Mohini Ekadashi 2021: इस दिन देवताओं ने किया था अमृतपान, जानिए मोहिनी एकादशी व्रत की कथा
- 23 मई को रखा जाएगा मोहिनी एकादशी का व्रत
- अमृत मंंथ से जुड़़ी हैं मोहिनी एकादशी की कथा
- मोहिनी एकादशी व्रत करने से मोह से मिलती है मुक्ति
विस्तार
हर माह में दोनों पक्षों, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। हर एकादशी का एक अलग नाम और महत्व होता है। वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। इस बार मोहिनी एकादशी व्रत 23 मई 2021 दिन रविवार को किया जाएगा। मान्यता है कि मोहिनी एकादशी के दिन व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है। मोहिनी एकादशी व्रत की कथा समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। जानते हैं मोहिनी एकादशी व्रत कथा और शुभ मुहूर्त।
मोहिनी एकादशी की कथा
पौराणिक ग्रंथों में मिलने वाली कथाओं के अनुसार जब देवताओं और असुरों के बीच जब समुद्र मंथन किया तो उससे अमृत कलश की प्राप्ति हुई। देवता और दानव दोनों ही पक्ष अमृत पाना चाहते थे। इसी कारण अमृत कलश की प्राप्ति को लेकर देवताओं और असुरों में विवाद छिड़ गया। जब विवाद की स्थिति बढ़ने लगी और युद्ध की तरफ अग्रसर होने लगी तो इस विवाद को सुलझाने और देवताओं में अमृत वितरित करने के लिए भगवान विष्णु ने एक सुंदर स्त्री का रूप धारण किया। इस सुंदर स्त्री का रूप देखकर असुर मोहित हो उठे। इसके बाद मोहिनी रूप धारण किए हुए विष्णु जी ने देवताओं को एक कतार में और दानवों को एक कतार में बैठ जाने को कहा। इस तरह से विष्णु जी ने देवताओं को अमृतपान करवा दिया। अमृत पीकर सभी देवता अमर हो गए। मान्यता के अनुसार जिस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था, उस दिन वैशाख मास की शुक्ल एकादशी तिथि थी चूंकि विष्णु जी ने मोहिनी रूप धारण किया था इसलिए इस दिन को मोहिनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा की जाती है।
एकादशी तिथि आरंभ- 22 मई 2021 को दिन शनिवार सुबह 09 बजकर 15 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्त- 23 मई 2021 को सुबह 06 बजकर 42 मिनट तक
पारणा मुहूर्त- 24 मई सुबह 05 बजकर 26 मिनट से सुबह 08 बजकर 10 मिनट तक
पारणा अवधि- 2 घंटे 44 मिनट