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Mithun Sankranti 2021: 15 जून को मिथुन संक्रांति, इन उपायों से सूर्यदेव होंगे प्रसन्न

Thu, 03 Jun 2021 03:32 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 03 Jun 2021 03:32 PM IST
सार

मिथुन संक्रांति के दिन सूर्यदेव की पूजा का विधान है। हिन्दू धर्म में इस पर्व का खास महत्व है। इस दिन पुण्य फल प्राप्त करन के लिए दान-धर्म के कार्य किए जाते हैं। यह पर्व प्रकृति में बदलाव का संकेत माना जाता है।

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Mithun Sankranti 2021 Date puja vidhi significance and remedies
मिथुन संक्रांति 2021: सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश - फोटो : Social media

विस्तार

Mithun Sankranti 2021: मिथुन संक्रांति पर्व 15 जून मंगलवार को मनाई जाएगी। मिथुन संक्रांति के दिन सूर्यदेव की पूजा का विधान है। हिन्दू धर्म में इस पर्व का खास महत्व है। इस दिन पुण्य फल प्राप्त करन के लिए दान-धर्म के कार्य किए जाते हैं। यह पर्व प्रकृति में बदलाव का संकेत माना जाता है। माना जाता है कि इसी दिन से वर्षा ऋतु की शुरूआत हो जाती है। साथ ही लोग इस दिन अच्छी खेती के लिए भगवान से खूब बारिश की मनोकामना करते हैं। मिथुन संक्रांति को रज पर्व भी कहा जाता है। रज पर्व के दिन भगवान सूर्यदेव को प्रसन्न करने के लिए कई जगहों पर तो व्रत करे का भी चलन है। आइए जानते हैं इस पर्व के बारे में विस्तार से। 
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मिथुन संक्रांति पर्व
ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, सूर्य ग्रह के राशि परिवर्तन को संक्रांति कहते हैं। सूर्य जिस भी राशि में गोचर करते हैं, उसे उसी राशि की संक्रांति माना जाता है। इस प्रकार साल भर में 12 संक्रांतियां आती हैं। जब सूर्य ग्रह मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं तो मिथुन संक्रांति के नाम से जाना जाता है। जेष्ठ के महीने में सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं। सूर्य देव एक राशि में एक माह तक रहते हैं। 
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सिलबट्टे की पूजा का है विधान
मिथुन संक्रांति पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। इस पर्व में सिलबट्टे की पूजा का विधान है। दरअसल, सिलबट्टे को लोग भूदेवी मानकर इसकी पूजा करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सिलबट्टे को दूध और पानी से पहले स्नान कराया जाता है। फिर सिलबट्टे को सिंदूर, चंदन लगाकर उस पर फूल और हल्दी चढ़ाई जाती है। 
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इस विधि से करें सूर्य की साधना
सूर्यदेव की पूजा के लिए सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें। इसके पश्चात् उगते हुए सूर्य का दर्शन करते हुए उन्हें ॐ घृणि सूर्याय नम: कहते हुए जल अर्पित करें। सूर्य को दिए जाने वाले जल में लाल रोली, लाल फूल मिलाकर जल दें। सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात्प लाल आसन में बैठकर पूर्व दिशा में मुख करके सूर्य के मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। 


स्नान-दान का महत्व
मिथुन संक्रांति के दिन पवित्र नदी, जलकुंड में स्नान करने एवं दान देने का भी बड़ा महत्व है। इस दिन ब्राह्मणों, गरीबों और जरूरतमंदों को दान देने से भगवान सूर्य प्रसन्न होते हैं। सूर्यदेव के आशीर्वाद से जीवन में संपन्नता, समाज में मान-सम्मान, उच्च-पद प्रतिष्ठा प्राप्त होता है। 
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