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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Makar Sankranti 2023 14 January Know Why Bhishma Pitamah Wants To Die On Uttarayan Sankranti Festival Stories

Makar Sankranti 2023: भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन ही क्यों छोड़ा शरीर, जानिए क्या है पौराणिक कथा

Sun, 15 Jan 2023 08:09 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आशिकी पटेल Updated Sun, 15 Jan 2023 08:09 AM IST
सार

Makar Sankranti 2023: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है। इस साल ये पर्व 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। इस पर्व को देश के हर हिस्से में अलग-अलग तरीके से मनाने की परंपरा है।

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Makar Sankranti 2023 14 January Know Why Bhishma Pitamah Wants To Die On Uttarayan Sankranti Festival Stories
भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन ही क्यों छोड़ा शरीर, जानिए क्या है पौराणिक कथा - फोटो : amar ujala

विस्तार

Makar Sankranti 2023, Bhishma Pitamah Story in Hindi: मकर संक्रांति हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है। इस साल ये पर्व 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। इस पर्व को देश के हर हिस्से में अलग-अलग तरीके से मनाने की परंपरा है। मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान को बहुत ही ज्यादा शुभ माना गया है। इस दिन किए गए गंगा स्नान को महा स्नान माना जाता है। साथ ही इस दिन से एक महीने का खरमास खत्म हो जाता है और मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति का खास जुड़ाव महाभारत से भी है। कहा जाता है कि भीष्म पितामह ने इस दिन अपने प्राण त्यागे थे। 58 दिनों तक बाणों की शैय्या पर रहने के बावजूद भी उन्होंने अपने प्राण त्यागने के लिए सूर्य देव के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की। चलिए जानते हैं इसके पीछे का कारण क्या है...  

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कहा जाता है कि भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। इसलिए महाभारत के युद्ध में अर्जुन द्वारा बाणों से बुरी तरह घायल किए जाने पर भी वे जीवित रहे। अठारह दिनों के युद्ध में भीष्म पितामह दसवें दिन घायल हुए थे। उनके मृत्यु शैय्या पर लेटने के बाद युद्ध आठ दिन और चला। लेकिन भीष्म पितामह ने शरीर नहीं त्यागा था, क्योंकि वे चाहते थे कि जब सूर्य उत्तरायण होगा तभी वे शरीर का त्याग करेंगे। भीष्म पितामह मृत्यु शैय्या पर 58 दिन तक रहे। उसके बाद उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने पर शरीर त्याग दिया। मान्यता है कि इस दिन प्राण त्यागने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
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कृष्ण ने भी बताया था उत्तरायण का महत्व 
शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने भी उत्तरायण के महत्व को बताया था। कृष्ण के मुताबिक उत्तरायण में शरीर त्यागने से जीवन मरण के बंधन से छुटकारा मिल जाता है। व्यक्ति सीधा मोक्ष प्राप्त करता है। यही कारण है कि भीष्म पितामह प्राण का त्याग करने के लिए सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा की।  

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