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Mahavir Jayanti 2024: वर्धमान कैसे बने महावीर? जानिए भगवान राम से क्या है इनका नाता
Thu, 11 Apr 2024 11:04 PM IST
ज्योति मेहरा
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Thu, 11 Apr 2024 11:04 PM IST
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Mahavir Jayanti 2024
- फोटो : अमर उजाला
Mahavir Jayanti 2024: जैन धर्म के 24वें व अंतिम तीर्थंकर महावीर जी का जन्म चैत्र माह में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन हुआ था। जैन संप्रदाय के लिए महावीर जयंती बहुत ही खास मानी जाती है। इस साल 21 अप्रैल को वर्धमान महावीर की जयंती मनाई जाएगी। इस दिन जैन धर्म के लोग भगवान महावीर की पूजा करते हैं और उनके दिए गए उपदेशों को स्मरण करते हैं। भगवान महावीर ने संसार को पांच सिद्धांत बताए हैं, जो आज भी लोगों को समृद्ध जीवन और आंतरिक शांति की ओर ले जाते हैं। इसके अलावा उनके कुछ अनमोल विचार भी मनुष्यों को जीवन में प्रेरणा देते हैं।
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भगवान महावीर का जन्म और श्री राम से उनका नाता
भगवान महावीर जैन धर्म के अंतिम और 24 वें तीर्थंकर हैं। इनका जन्म इक्ष्वाकु राजवंश के राजा सिद्धार्थ और रानी त्रिशला के एक शाही क्षत्रिय परिवार में हुआ था। महावीर जी का संबंध सनातन धर्म में आस्था के सबसे बड़े प्रतीक भगवान राम से भी माना जाता है। क्योंकि महावीर जैन का जन्म भी उसी कुल में हुआ था, जिस कुल में भगवान राम जन्मे थे। भगवान राम और महावीर जी दोनों सूर्यवंशी हैं। साथ ही दोनों इक्ष्वाकु वंश से नाता रखते हैं।
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वर्धमान बने महावीर
भगवान महावीर का जन्म होते ही राजा सिद्धार्थ के राज्य, मान-प्रतिष्ठा, धन-धान्य में वृद्धि होने लगी थी। इसलिए इनका नाम वर्धमान रखा गया। वर्धमान बचपन से ही बड़े साहसी व निर्भीक थे। इनके पराक्रम के कारण आगे चलकर वे महावीर के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन्होंने ज्ञान की प्राप्ति के लिए कई वर्षों तक कठोर तप किया। वर्धमान ने 30 वर्ष की आयु में राजसी सुख-सुविधाओं का त्याग कर तप का आचरण किया। 12 साल 6 महीने और 5 दिनों के कठोर तप के बाद उन्होंने अपनी इच्छाओं और विकारों पर नियंत्रण प्राप्त कर लिया और इस दौरान उन्हें कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई। इस कठोर तप को करने के बाद ही वर्धमान महावीर कहलाए।
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कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति के बाद महावीर स्वामी जी ने चार तीर्थों की स्थापना की, जिसमें साधु, साध्वी, श्रावक और श्राविका शामिल हैं। यह कोई लौकिक तीर्थ नहीं बल्कि एक सिद्धांत हैं। इसमें जैन धर्म के सिद्धांत सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, अस्तेय ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए अपनी ही आत्मा को तीर्थ बनाने के बारे में कहा गया है।
महावीर जी के अनमोल विचार
महावीर जी में संसार के सामने अपने अनमोल विचार भी रखे हैं। उनका कहना है कि अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है। प्रत्येक जीव अपने आप में स्वतंत्र है। किसी भी आत्मा की सबसे बड़ी गलती अपने असल रूप को ना पहचानना होती है। इस गलती को केवल आत्म ज्ञान प्राप्त करके ठीक किया जा सकता है। उन्होंने ये भी कहा कि भगवान का अलग से कोई अस्तित्व नहीं है। हर कोई सही दिशा में सर्वोच्च प्रयास करके देवत्व प्राप्त कर सकता है।