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Lord Ganesha: भगवान गणेशजी का वाहन मूषक क्यों ? जानिए 2 रोचक कथाएं

Wed, 01 Jun 2022 02:39 PM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 01 Jun 2022 02:39 PM IST
सार

शास्त्रों में बुधवार का दिन गणेशजी का माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस दिन गणेशजी के निमित्त व्रत और पूजा करने से भक्तों के सारे संकट दूर हो जाते हैं एवं गणेश जी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। गणेश शिव-गौरी नंदन हैं। उनका वाहन मूषक है। भगवान गणेश की शारीरिक बनावट के हिसाब से उनका वाहन छोटा सा चूहा क्यों है?

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lord ganesh katha know story behind a mouse is the vehicle of lord ganesha
ganesh katha 2022: भगवान गणेश की शारीरिक बनावट के हिसाब से उनका वाहन छोटा सा चूहा क्यों है? - फोटो : Istock

विस्तार

भगवान गणेश देवताओं में अग्रपूज्य हैं, विघ्नहर्ता हैं। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत इनकी पूजा से ही होती है। शास्त्रों में बुधवार का दिन गणेशजी का माना गया है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस दिन गणेशजी के निमित्त व्रत और पूजा करने से भक्तों के सारे संकट दूर हो जाते हैं एवं गणेश जी भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। गणेश शिव-गौरी नंदन हैं। उनका वाहन मूषक है। भगवान गणेश की शारीरिक बनावट के हिसाब से उनका वाहन छोटा सा चूहा क्यों है? आइए जानते हैं रोचक कथाएं-

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पहली कथा
गणेश पुराण के अनुसार राजा इन्द्र के दरबार में क्रौंच नामक गंधर्व था। एक बार इंद्र की सभा में क्रौंच अप्सराओं से हंसी ठिठोली करने व्यस्त था। इंद्र का ध्यान उस पर गया तो नाराज इंद्र ने उसे चूहा बन जाने का श्राप दे दिया। स्वभाव से चंचल क्रौंच एक बलवान मूषक के रूप में सीधे पराशर ऋषि के आश्रम में जा गिरा, वहां जाते ही उसने भयंकर उत्पात मचा दिया,आश्रम के सारे मिट्टी के पात्र तोड़कर सारा अन्न खा गया,वाटिका भी उजाड़ डाली,ऋषियों के सारे वस्त्र और ग्रंथ कुतर डाले। पराशर ऋषि बहुत दुखी हो गए और सोचने लगे अब इस चूहे के आतंक से कैसे बचा जाए? पराशर ऋषि दुखी होकर श्री गणेश की शरण में गए। तब गणेश जी ने पराशर जी को कहा कि मैं अभी इस मूषक को अपना वाहन बना लेता हूं। गणेश जी ने अपना तेजस्वी पाश फेंका,पाश उस मूषक का पीछा करता पाताल तक गया और उसका कंठ बांध लिया और उसे घसीट कर बाहर निकाल गजानन के सम्मुख उपस्थित कर दिया। 
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पाश की पकड़ से मूषक मूर्छित हो गया। मूर्छा खुलते ही मूषक ने गणेश जी की आराधना शुरू कर दी और अपने प्राणों की भीख मांगने लगा। गणेश जी मूषक की स्तुति से प्रसन्न तो हुए लेकिन उससे कहा कि तूने ब्राह्मणों को बहुत कष्ट दिया है मैंने दुष्टों के नाश एवं साधु पुरुषों के कल्याण के लिए ही अवतार लिया है,लेकिन शरणागत की रक्षा भी मेरा परम धर्म है,इसलिए जो वरदान चाहो मांग लो। ऐसा सुनकर उस उत्पाती मूषक का अहंकार जाग उठा,बोला,मुझे आपसे कुछ नहीं मांगना है,आप चाहें तो मुझसे वर की याचना कर सकते हैं। मूषक की गर्व भरी वाणी सुनकर गणेश जी मन ही मन मुस्कराए और कहा, ‘यदि तेरा वचन सत्य है तो तू मेरा वाहन बन जा। मूषक के तथास्तु कहते ही गणेश जी तुरंत उस पर आरूढ़ हो गए। अब भारी भरकम गजानन के भार से दबकर मूषक के प्राण संकट में पड़ गए। तब उसने गजानन से प्रार्थना की कि वे अपना भार उसके वहन करने योग्य बना लें। इस तरह मूषक का गर्व चूर कर गणेश जी ने उसे अपना वाहन बना लिया।
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दूसरी कथा
कथा के अनुसार एक बार गजमुखासुर नाम के राक्षस ने अपने बाहुबल से देवताओं को बहुत परेशान कर दिया। सभी देवता एकत्रित होकर भगवान गणेश के पास मदद मांगने पहुंचे। तब भगवान श्रीगणेश ने उन्हें गजमुखासुर से मुक्ति दिलाने का भरोसा दिया तब श्रीगणेश का गजमुखासुर दैत्य से भयंकर युद्ध हुआ। कहते हैं उस युद्ध में श्रीगणेश का एक दांत टूट गया। तब क्रोधित होकर श्रीगणेश ने टूटे दांत से गजमुखासुर पर ऐसा प्रहार किया कि वह घबराकर चूहा बनकर भागा लेकिन गणेशजी ने उसे पकड़ लिया। मृत्यु के भय से वह क्षमा मांगने लगा तब श्रीगणेश ने मूषक रूप में ही उसे अपना वाहन बना लिया।

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