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श्रीविष्णु की कृपा प्राप्ति के लिए 'कार्तिक' श्रेष्ठ माह
Tue, 02 Nov 2021 05:19 PM IST
विनोद शुक्ला
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 02 Nov 2021 05:19 PM IST
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दिवाली
- फोटो : Pixabay
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श्रीविष्णु की पूजा आराधना के लिए श्रेष्ठ कार्तिक माह चल रहा है जो 19 नवंबर, शुक्रवार को कार्तिक पूर्णिमा के दिन संपन्न होगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार ने कार्तिक माह आध्यात्मिक उन्नति तथा भगवान श्रीविष्णु की कृपा प्राप्ति का सहज सुअवसर लाता है। यज्ञपुरुष भगवान विष्णु की आराधना के लिए यह माह अति पुण्यप्रद है। इसी माह में उन्होंने अपने बहुत से भक्तों को उनकी तपस्यासे प्रसन्न होकर दर्शन दिए और उनका का उद्धार कर मोक्ष प्रदान किया। जिनमें भक्ति की ज्योति श्री गुणवती जी की कथा सर्वोपरि है। ऐसी मान्यता है कि कार्तिक माह में यदि एकदिन भी ब्रह्म मुहूर्त में स्नान-ध्यान करके 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप तुलसी की माला से किया जाय तो अद्भुत दिव्य ज्योति का आभास होता है।
प्राणियों को सहजभाव से अपने जप-तप का पुण्यलाभ मिलने लगता है। इस माह में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी प्रेमावातार श्रीराधा की आराधना करते हैं और स्वयं राधा-दामोदर के रूप में वृन्दावन में पूजा ग्रहणकरते हैं। इसमाह चन्द्रमा भी अपनी सभी कलाओं के साथ यज्ञपुरुष श्रीहरि का स्तवन करते हैं। श्रीनारायण के भक्तजन माहपर्यंत प्रातःकाल में भक्तजन अपने वाद्ययंत्र ढोल-मजीरों के साथ 'गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो' राधारमण हरि गोविंद बोलो' का भजन करते हुएप्रभात फेरियाँ निकालते है।
शास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह में श्रीविष्णु एवं उनकीशक्ति श्रीमहालक्ष्मी की आराधना का पुण्यफल भक्तों-साधकों के लिए वर्षपर्यंत क्षय नहीं होता और उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा से प्राणी सच्चिदानंद का आभास करता रहता है। उनके कार्य-व्यापारमें आने वाली बाधायें भी दूर होती जाती हैं। इसी माह में भगवान शिव ने त्रिलोक की रक्षा के लिए महादैत्य त्रिपुरासुर का वध किया थाऔर वे त्रिपुरारी के रूप में भी पूजित हुए थे तभी से कार्तिक माह में किये गए श्री रुद्राभिषेक का फल शिवरात्रि तथा श्रावण की तरह अतिपुण्य फलदायक तथा भक्तों का कल्याण करने वाला है। सिद्ध महात्मा, साधुसंत तथा यज्ञकर्ता ब्राह्मण आदि 'हरिहरात्मक' यज्ञ संपन्नकरके श्री हरि और श्रीरूद्र दोनों कि कृपा प्राप्त करते हैं।
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इस माह की मास शिवरात्रि को त्रिपुरांतकारी भगवान श्रीशिव का महारुद्राभिषेककरने से प्राणी को उनकी जन्मकुंडली में मारकेश की महादशा, अन्तर्दशा अथवा प्रत्यंतर दशा के अशुभ प्रभाव, अकाल मृत्युदोष तथा कार्य-व्यापार में बाधा आने का भय नहीं रहता। भक्तों द्वारा आयोजित महारुद्र यज्ञों में शामिल होकर पुण्य अर्जित करें। माह पर्यंत शायंप्रदोष वेला में आकाश की ओर देखते हुए कुमार कार्तिकेय की सभी छ: कृतिका माताओं 'शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा''को प्रणाम करें। इससे कार्तिकेय की भी कृपा प्राप्त होगी ये परम तांत्रिक एवं ज्ञान के भण्डार हैं। इनकी कृपा से भी घर की नकारात्मकऊर्जा दूर हो जाती है और घर में सुख-शांति रहती है इसलिए कार्तिक माह का एक-एक दिन अति महत्वपूर्ण हैं इसे अवसर के रूप में ग्रहण करें।
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प्राणियों को सहजभाव से अपने जप-तप का पुण्यलाभ मिलने लगता है। इस माह में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी प्रेमावातार श्रीराधा की आराधना करते हैं और स्वयं राधा-दामोदर के रूप में वृन्दावन में पूजा ग्रहणकरते हैं। इसमाह चन्द्रमा भी अपनी सभी कलाओं के साथ यज्ञपुरुष श्रीहरि का स्तवन करते हैं। श्रीनारायण के भक्तजन माहपर्यंत प्रातःकाल में भक्तजन अपने वाद्ययंत्र ढोल-मजीरों के साथ 'गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो' राधारमण हरि गोविंद बोलो' का भजन करते हुएप्रभात फेरियाँ निकालते है।
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शास्त्रों के अनुसार कार्तिक माह में श्रीविष्णु एवं उनकीशक्ति श्रीमहालक्ष्मी की आराधना का पुण्यफल भक्तों-साधकों के लिए वर्षपर्यंत क्षय नहीं होता और उसकी आध्यात्मिक ऊर्जा से प्राणी सच्चिदानंद का आभास करता रहता है। उनके कार्य-व्यापारमें आने वाली बाधायें भी दूर होती जाती हैं। इसी माह में भगवान शिव ने त्रिलोक की रक्षा के लिए महादैत्य त्रिपुरासुर का वध किया थाऔर वे त्रिपुरारी के रूप में भी पूजित हुए थे तभी से कार्तिक माह में किये गए श्री रुद्राभिषेक का फल शिवरात्रि तथा श्रावण की तरह अतिपुण्य फलदायक तथा भक्तों का कल्याण करने वाला है। सिद्ध महात्मा, साधुसंत तथा यज्ञकर्ता ब्राह्मण आदि 'हरिहरात्मक' यज्ञ संपन्नकरके श्री हरि और श्रीरूद्र दोनों कि कृपा प्राप्त करते हैं।
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इस माह की मास शिवरात्रि को त्रिपुरांतकारी भगवान श्रीशिव का महारुद्राभिषेककरने से प्राणी को उनकी जन्मकुंडली में मारकेश की महादशा, अन्तर्दशा अथवा प्रत्यंतर दशा के अशुभ प्रभाव, अकाल मृत्युदोष तथा कार्य-व्यापार में बाधा आने का भय नहीं रहता। भक्तों द्वारा आयोजित महारुद्र यज्ञों में शामिल होकर पुण्य अर्जित करें। माह पर्यंत शायंप्रदोष वेला में आकाश की ओर देखते हुए कुमार कार्तिकेय की सभी छ: कृतिका माताओं 'शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा''को प्रणाम करें। इससे कार्तिकेय की भी कृपा प्राप्त होगी ये परम तांत्रिक एवं ज्ञान के भण्डार हैं। इनकी कृपा से भी घर की नकारात्मकऊर्जा दूर हो जाती है और घर में सुख-शांति रहती है इसलिए कार्तिक माह का एक-एक दिन अति महत्वपूर्ण हैं इसे अवसर के रूप में ग्रहण करें।