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Kalashtami Vrat 2023: दिसंबर में कब है कालाष्टमी व्रत? रोग, दोष, भय से बचने के लिए ऐसे करें काल भैरव की पूजा
Sat, 02 Dec 2023 07:51 AM IST
आशिकी पटेल
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आशिकी पटेल
Updated Sat, 02 Dec 2023 07:51 AM IST
सार
Kalashtami Vrat 2023: प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस बार 5 दिसबंर को कालाष्टमी है। कालाष्टमी व्रत के दिन भगवान शिव का रौद्र रूप माने जाने वाले बाबा कालभैरव की पूजा की जाती है।
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कालाष्टमी व्रत
- फोटो : self
विस्तार
Kalashtami Vrat 2023: प्रत्येक माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रखा जाता है। इस बार 5 दिसबंर को कालाष्टमी है। कालाष्टमी व्रत के दिन भगवान शिव का रौद्र रूप माने जाने वाले बाबा कालभैरव की पूजा की जाती है। कालभैरव को शिव का पांचवा अवतार माना गया है। कालभैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक हैं। ये अपने भक्तों की सदैव रक्षा करते हैं। कहा जाता है कि भगवान भैरव के भक्तों का अनिष्ट करने वालों को तीनों लोकों में कोई शरण नहीं दे सकता। काल भी इनसे भयभीत रहता है, इसलिए इन्हें कालभैरव कहा जाता है। कालाष्टमी के दिन बाबा काल भैरव की पूजा करने से जीवन के सभी संकट, काल, दुख दूर हो जाते हैं। ऐसे में चलिए जानते हैं कालाष्टमी की पूजा विधि और महत्व के बारे में...
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कालाष्टमी व्रत की पूजा विधि
कालाष्टमी व्रत का महत्व
अगर आपके दुख कम नहीं हो रहे हैं, हर दिन जीवन में चुनौतियां मिल रही हैं तो कालाष्टमी के दिन बाबा भैरव की पूजा जरूर करें। मान्यता है कि इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने से सभी तरह के भय से मुक्ति मिल जाती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही इस दिन व्रत रखने से भैरव भगवान की कृपा प्राप्त होती है और शत्रुओं से छुटकारा भी मिल जाता है।
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काल भैरव मंत्र
ओम कालभैरवाय नम:
ओम भयहरणं च भैरव:
ओम ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं.
ओम भ्रं कालभैरवाय फट्
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कालाष्टमी व्रत की पूजा विधि
- कालाष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नित्य कर्म और स्नान आदि करने के बाद भगवान भैरव की पूजा- अर्चना करें।
- इस दिन भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती और भगवान गणेश की भी विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
- पूजा के दौरान घर के मंदिर में दीपक जलाएं, आरती करें और भगवान को भोग लगाएं।
- एक बात का ध्यान जरूर रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का ही भोग लगाया जाता है।
कालाष्टमी व्रत का महत्व
अगर आपके दुख कम नहीं हो रहे हैं, हर दिन जीवन में चुनौतियां मिल रही हैं तो कालाष्टमी के दिन बाबा भैरव की पूजा जरूर करें। मान्यता है कि इस दिन भगवान भैरव की पूजा करने से सभी तरह के भय से मुक्ति मिल जाती है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही इस दिन व्रत रखने से भैरव भगवान की कृपा प्राप्त होती है और शत्रुओं से छुटकारा भी मिल जाता है।
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काल भैरव मंत्र
ओम कालभैरवाय नम:
ओम भयहरणं च भैरव:
ओम ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरूकुरू बटुकाय ह्रीं.
ओम भ्रं कालभैरवाय फट्