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Jagannatha Rath Yatra: पुरी में जगन्नाथ स्नान पूर्णिमा पर उमड़े श्रद्धालु, जानें 200 साल पुरानी परंपरा के बारे

Wed, 11 Jun 2025 02:46 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 11 Jun 2025 02:46 PM IST
सार

Rath Yatra Tradition: पुरी में आज देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का भव्य जलाभिषेक संपन्न हुआ। तीनों विग्रहों को ‘पाहंडी’ परंपरा से स्नान मंडप लाया गया और 108 कलशों से पवित्र जल से स्नान कराया गया।

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Jagannatha Rath Yatra Lakhs congregate in Puri to witness Lord Jagannath bathing rituals
जगन्नाथ रथयात्रा का महत्व - फोटो : adobe stock

विस्तार

Jagannatha Rath Yatra Rituals: पुरी में आज देव स्नान पूर्णिमा पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का भव्य जलाभिषेक संपन्न हुआ। तीनों विग्रहों को ‘पाहंडी’ परंपरा से स्नान मंडप लाया गया और 108 कलशों से पवित्र जल से स्नान कराया गया। मुख्यमंत्री मोहन माझी और गजपति महाराज भी मौजूद रहे। स्नान के बाद देवताओं को गजवेश धारण कराया गया।

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अब भगवान 14 दिन ‘अनसारा गृह’ में विश्राम करेंगे। दर्शन 26 जून को दोबारा खुलेंगे, और 27 जून को भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। सुरक्षा के लिए कैमरे और 70 प्लाटून बल तैनात किए गए हैं। इसी क्रम में आइए जानते हैं पाहंडी परंपरा, सुनाकुआ,गजवेश, अनसारा घर आदि का क्या महत्व है। 
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Jagannatha Rath Yatra Lakhs congregate in Puri to witness Lord Jagannath bathing rituals
जगन्नाथ रथयात्रा का महत्व - फोटो : adobe stock

पाहंडी यात्रा
आज यानी 11 जून प्रातः 5:45 बजे श्री सुदर्शन, बलभद्र, सुभद्रा, और अंत में भगवान जगन्नाथ को क्रमवार गर्भगृह से बाहर निकाला गया और स्नान मंडप तक ले जाया गया। इसे पाहंडी परंपरा कहते हैं। इस में देवताओं को गर्भगृह से स्नान मंडप तक ले जाने का भव्य प्रक्रिया-नृत्य होता है। इसे ‘पाहंडी विजया’ भी कहा जाता है।

Jagannatha Rath Yatra Lakhs congregate in Puri to witness Lord Jagannath bathing rituals
जगन्नाथ रथयात्रा का महत्व - फोटो : adobe stock

सुनाकुआ 
सुनाकुआ का अर्थ हैं स्वर्ण का कुआं या सोने का कुआं।  मंदिर परिसर के उत्तर द्वार के समीप स्थित एक स्वर्ण कुआं है। इस पवित्र कुएं का पानी केवल साल में एक बार स्नान के समय ही निकाला जाता है । आज दोपहर 12:20 बजे, 108 पवित्र कलशों में यह जल भरकर देवों के स्नान के लिए प्रयोग किया गया और इसके साथ ही चंदन, जड़ी-बूटी और सुगंधित फूलों के साथ  मंत्रोच्चार भी किया गया ।

Jagannatha Rath Yatra Lakhs congregate in Puri to witness Lord Jagannath bathing rituals
जगन्नाथ रथयात्रा का महत्व - फोटो : adobe stock

गजवेश क्या है?
‘गज’ यानी हाथी, ‘वेश’ यानी रूप या वेशभूषा। गजवेश का अर्थ है भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को हाथी के स्वरूप में सजाया जाना। यह परंपरा देव स्नान पूर्णिमा के दिन, स्नान के बाद की जाती है। जब विग्रहों को 108 कलशों से स्नान कराया जाता है, तो मान्यता है कि वे बीमार पड़ जाते हैं और उसके बाद उन्हें गज के रूप में सजाया जाता है।

Jagannatha Rath Yatra Lakhs congregate in Puri to witness Lord Jagannath bathing rituals
जगन्नाथ रथयात्रा का महत्व - फोटो : adobe stock

अनसारा गृह
देव स्नान पूर्णिमा के दिन 108 पवित्र कलशों से स्नान के बाद, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को मानवीय रूप में बीमार माना जाता है और उन्हें 14 दिनों के लिए मंदिर के भीतर बने "अनसारा गृह" में विश्राम के लिए ले जाया जाता है। इस दौरान उन्हें आम दर्शन से दूर रखा जाता है और मंदिर के वैद्य उन्हें आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों, काढ़ों और लेपों से उपचारित करते हैं। यह समय भक्तों के लिए विरह और प्रतीक्षा का होता है, क्योंकि भगवान अदृश्य रहते हैं। 26 जून को “नवयौवन दर्शन” के दिन वे स्वस्थ, युवा और तेजस्वी रूप में फिर प्रकट होते हैं, और अगले दिन, 27 जून को रथयात्रा के साथ वे भक्तों के बीच पुनः लौट आते हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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