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Indira Ekadashi Vrat 2020: इंदिरा एकादशी व्रत से पितरों को मिलता है मोक्ष
Wed, 09 Sep 2020 07:15 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Wed, 09 Sep 2020 07:15 AM IST
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इंदिरा एकादशी 2020
- फोटो : अमर उजाला
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इंदिरा एकादशी व्रत आश्विन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के रखा जाता है। यह तिथि 13 सितंबर को पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए यह व्रत किया जाता है। इस व्रत का महत्व स्वयं श्री कृष्ण ने इंदिरा एकादशी व्रत कथा का महत्व धर्मराज युद्धिष्ठर को बताया था।
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इंदिरा एकादशी व्रत का महत्व
शास्त्रों में पितृ पक्ष के दौरान आने वाली इस एकादशी को पितरों को मोक्ष दिलाने वाली माना गया है। जो जातक यह व्रत अपने पितरों के निमित्त सच्ची श्रद्धा के साथ करता है उनके पितरों को फलस्वरूप मोक्ष की प्राप्ति होती है। अगर कोई पितर भूलवश अपने पाप के कर्मों के कारण यमराज के दंड का भागी रहता है तो उसके परिजन के द्वारा यह एकादशी व्रत जरूर करना चाहिए।
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इंदिरा एकादशी व्रत कथा (Indira Ekadashi Vrat Katha)
इंद्रसेन नाम का एक राजा था जिसका महिष्मति राज्य पर शासन था। राजा के राज्य में सभी प्रजा सुखी थी और राजा इंद्रसेन भगवान विष्णु के परम भक्त थे। एक बार राजा के दरबार में देवर्षि नारद पहुंचे तब राजा ने उनका स्वागत सत्कार किया और आने का कारण पूछा।
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तब देवर्षि नारद ने बताया कि मैं यम से मिलने यमलोक गया था, वहां मैंने तुम्हारे पिता को देखा। वहां वह अपने पूर्व जन्म में एकादशी व्रत के खण्डित होने का दंड भोग रहे हैं। उन्हें तमाम तरह की यातनाएं झेलनी पड़ रही है। इसके लिए उन्होंने आपसे इंदिरा एकादशी का व्रत करने को कहा है ताकि उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हो सके।
तब राजा ने नारद जी से इंदिरा एकादशी व्रत के बारे में जानकारी देने को कहा। देवर्षि ने आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी व्रत की विधि के पालन के बारे में बताया, जिससे उनके पिता की आत्मा को शांति मिली और बैकुंठ की प्राप्ति हुई।
इंदिरा एकादशी पूजा मूहूर्त
एकादशी प्रारम्भ: 13 सितंबर की सुबह 04 बजकर 13 मिनट पर
एकादशी समाप्त: 14 सितंबर की सुबह 03 बजकर 16 मिनट तक
पारण का समय: 14 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से शाम 03 बजकर 27 मिनट तक