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जानिए चरणामृत ग्रहण करने के फायदे और धार्मिक महत्व
Thu, 19 Sep 2024 03:50 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 19 Sep 2024 03:50 PM IST
सार
शास्त्रों के अनुसार, चरणामृत का सेवन भगवान के चरणों की पवित्रता और उनके आशीर्वाद को अपने भीतर धारण करने का प्रतीक है। यह मान्यता है कि चरणामृत पीने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
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चरणामृत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शास्त्रों में चरणामृत का विशेष महत्व बताया गया है। चरणामृत, जो भगवान के चरणों को स्पर्श कर प्राप्त किया जाता है, धार्मिक क्रियाओं का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। इसका सेवन एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है जो भक्तों के लिए अनेक लाभकारी माना गया है। आइए जानते हैं चरणामृत पीने के महत्व और इसके फायदों के बारे में विस्तार से।
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धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, चरणामृत का सेवन भगवान के चरणों की पवित्रता और उनके आशीर्वाद को अपने भीतर धारण करने का प्रतीक है। यह मान्यता है कि चरणामृत पीने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे भगवान की कृपा प्राप्त होती है। जब भगवान के चरणों का स्पर्श किया गया जल भक्तों को दिया जाता है, तो उसे श्रद्धा के साथ ग्रहण करना चाहिए क्योंकि वह पवित्र और दिव्य होता है। विष्णु पुराण, भागवत पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में भी चरणामृत का महत्व वर्णित है।
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आध्यात्मिक शुद्धि
चरणामृत का सेवन आत्मा की शुद्धि के रूप में माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान के चरणों का स्पर्श करने वाला जल व्यक्ति के भीतर की नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करता है और उसकी आत्मा को शुद्ध करता है। इसे पीने से मनुष्य का अहंकार नष्ट होता है और उसमें विनम्रता, भक्ति और सेवा भाव का विकास होता है। भक्तगण जब श्रद्धापूर्वक चरणामृत का सेवन करते हैं, तो उनके भीतर की बुरी प्रवृत्तियां समाप्त होती हैं और शुद्ध विचारों का संचार होता है।
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स्वास्थ्य लाभ
धार्मिक दृष्टि से चरणामृत का सेवन शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना गया है। चरणामृत में तुलसी, गंगाजल, और अन्य औषधीय तत्वों का समावेश होता है, जो आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होते हैं। तुलसी को औषधीय गुणों से युक्त माना गया है जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और शरीर को शुद्ध करने में सहायक है। गंगाजल में रोग नाशक तत्व होते हैं और इसका सेवन शरीर के विषैले तत्वों को नष्ट करने में सहायक होता है।
पापों से मुक्ति
शास्त्रों में चरणामृत को पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। यह मान्यता है कि जब भक्त चरणामृत ग्रहण करता है, तो उसके पूर्व जन्म और इस जन्म के पापों का नाश होता है। श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित है कि जो व्यक्ति भगवान के चरणामृत का सेवन करता है, वह भवसागर से मुक्त हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति करता है। यह आध्यात्मिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो व्यक्ति को भगवान की ओर ले जाता है।
आशीर्वाद और सौभाग्य
चरणामृत का सेवन करने से व्यक्ति को भगवान का आशीर्वाद और सौभाग्य प्राप्त होता है। यह माना जाता है कि चरणामृत ग्रहण करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। यह भगवान की कृपा का प्रतीक है और इसे ग्रहण करने वाला व्यक्ति भगवान के निकट माना जाता है। इसके सेवन से जीवन के कष्टों का नाश होता है और मन में शांति का संचार होता है।
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