Hanuman Janmotsav 2025: हनुमान जी को क्यों चढ़ाया जाता है सिंदूर? जानिए क्या है इसके पीछे की कथा
Bajrang Bali Puja: आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी हम हनुमान जी की पूजा करते हैं, उनके शरीर पर सिंदूर का रंग हमें हमेशा दिखाई देता है। यह रंग सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि एक गहरी और भावनात्मक कथा से जुड़ा हुआ है, जो भक्ति, विश्वास के रूप में देखा जाता है।
विस्तार
हनुमान जन्मोत्सव का महत्व अत्यंत विशेष है। यह पर्व विशेष रूप से हनुमान जी की पूजा और उनकी महिमा को समर्पित होता है। हनुमान जी, जो कि भगवान राम के परम भक्त और पवन पुत्र के रूप में प्रसिद्ध हैं, उनके जन्म की खुशी में यह उत्सव मनाया जाता है। हनुमान जी का जन्म, पवन देवता (वायु देवता) और अंजनी देवी के पुत्र के रूप में हुआ था। उनके जन्म का उद्देश्य था भगवान राम की सहायता करना और राक्षसों का नाश करना। हनुमान जी का जन्म भगवान राम के आदर्श भक्त और पवित्रता का प्रतीक बनकर हुआ, ताकि वे धर्म की रक्षा कर सकें और बुराई से लड़ सकें।
हनुमान जी को क्यों चढ़ाया जाता है सिंदूर?
आपने अक्सर देखा होगा कि जब भी हम हनुमान जी की पूजा करते हैं, उनके शरीर पर सिंदूर का रंग हमें हमेशा दिखाई देता है। यह रंग सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि एक गहरी और भावनात्मक कथा से जुड़ा हुआ है, जो भक्ति, विश्वास के रूप में देखा जाता है। तो आज की इस खबर में हम आपको हनुमान जी पर सिंदूर चढ़ाने के पीछे की वजह के बारे में बताने जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
यह है हनुमान जी के सिंदूर लगाने के पीछे की कथा
एक दिन बाल ब्रह्मचारी हनुमान जी ने देखा कि मां सीता अपने माथे पर सिंदूर लगा रही थीं। यह दृश्य देखकर हनुमान जी के मन में एक जिज्ञासा जागी और उन्होंने पूछा, “मां, यह सिंदूर आप क्यों लगा रही हैं?” मां सीता मुस्कुराकर जवाब देती हैं, "प्यारे हनुमान, यह सिंदूर मैं श्रीराम की लंबी उम्र और उनके सुख-शांति के लिए लगाती हूं।"
इस वजह से हनुमान जी लगाते हैं सिंदूर
मां सीता के शब्दों ने हनुमान जी के दिल को छू लिया। उनका प्रेम और भक्ति इतनी गहरी थी कि उन्होंने सोचा, "अगर एक छोटी सी सिंदूर श्रीराम की उम्र बढ़ा सकती है, तो क्यों न मैं अपने पूरे शरीर को सिंदूर से रंग दूं, ताकि मेरे प्रभु का जीवन और भी लंबा हो जाए।" यह विचार आते ही हनुमान जी ने पूरे शरीर को सिंदूर से रंग दिया और श्रीराम के पास पहुंचे।
श्रीराम ने दिया आशीर्वाद
जब भगवान श्रीराम ने हनुमान जी को सिंदूर में रंगा हुआ देखा, तो वह पहले तो थोड़े हैरान हुए, फिर मुस्कराकर बोले, “हे पवनपुत्र। यह क्या किया तुमने?” हनुमान जी ने पूरी श्रद्धा के साथ अपनी भावना समझाई। श्रीराम ने सुनकर उनका आशीर्वाद दिया और कहा, “तुम्हारी भक्ति बेमिसाल है। अब से जो भी भक्त मुझे सिंदूर चढ़ाएगा, उसकी हर इच्छा पूरी होगी।”
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