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Hanuman Ashtak Path: मंगलवार को करें हनुमान अष्टक का पाठ, दूर होंगे सभी संकट

Mon, 25 Nov 2024 05:58 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Mon, 25 Nov 2024 05:58 PM IST
सार

Hanuman Ashtak Path: हिंदू धर्म में रोजाना हनुमान जी की पूजा की जाती है परंतु मंगलवार का दिन सबसे शुभ है।

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Hanuman Ashtak Path lyrics and benefits know mangalwar upay
Hanuman Ashtak Path - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Hanuman Ashtak Path: हिंदू धर्म में रोजाना हनुमान जी की पूजा की जाती है परंतु मंगलवार का दिन सबसे शुभ है। स्कंद पुराण के अनुसार बजरंग बली का जन्म मंगलवार के दिन हुआ था, तभी से यह दिन उनकी पूजा के लिए समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन पवन पुत्र हनुमान जी की आराधना करने से सभी तरह के संकट टल जाते हैं। हनुमान भक्तों के लिए यह दिन और भी खास माना जाता है, क्योंकि इस दिन व्रत रखने से साधक को मानसिक शांति और शारीरिक बल की प्राप्ति होती हैं।

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ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार मंगलवार को पूजा पाठ करने से कुंडली में मंगल मजबूत होता है, जिसका प्रभाव भक्तों के करियर और व्यापार पर पड़ता है। ऐसे में प्रत्येक मंगलवार को हनुमान अष्टक का पाठ करने से बजरंगबली प्रसन्न होते हैं, और जातक की कुंडली में भी मंगल ग्रह मजबूत होता है। ऐसे में आइए इस पाठ के बारे में जानते हैं। 

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  • संकटमोचन हनुमान अष्टक :-

बाल समय रवि भक्षि लियो तब,



तीनहुं लोक भयो अंधियारों

ताहि सो त्रास भयो जग को,

यह संकट काहु सों जात  न टारो

देवन आनि करी विनती तब,

छाड़ि दियो रवि कष्ट निवारो

को नहीं जानत है जग में कपि,

संकटमोचन नाम तिहारो, को – १


बालि की त्रास कपीस बसै गिरि,

जात महाप्रभु पंथ निहारो

चौंकि महामुनि शाप दियो तब ,

चाहिए कौन बिचार बिचारो

कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,

सो तुम दास के शोक निवारो, – को – २


अंगद के संग लेन गए सिय,

खोज कपीश यह बैन उचारो

जीवत ना बचिहौ हम सो  जु ,

बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो

हेरी थके तट सिन्धु सबै तब ,

लाए सिया-सुधि प्राण उबारो,-  को – ३


रावण त्रास दई सिय को तब ,

राक्षसि सो कही सोक निवारो

ताहि समय हनुमान महाप्रभु ,

जाए महा रजनीचर मारो

चाहत सीय असोक सों आगिसु ,

दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो, -को – ४


बान लग्यो उर लछिमन के तब ,

प्राण तजे सुत रावन मारो

लै गृह बैद्य सुषेन समेत ,

तबै गिरि द्रोण सुबीर उपारो

आनि संजीवन हाथ दई तब ,

लछिमन के तुम प्रान उबारो, – को – ५


रावन युद्ध अजान कियो तब ,

नाग कि फांस सबै सिर डारो

श्री रघुनाथ समेत सबै दल ,

मोह भयो यह संकट भारो

आनि खगेस तबै हनुमान जु ,

बंधन काटि सुत्रास निवारो,-  को – ६


बंधु समेत जबै अहिरावन,

लै रघुनाथ पताल सिधारो

देवहिं पूजि भली विधि सों बलि ,

देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो

जाये सहाए भयो तब ही ,

अहिरावन सैन्य समेत संहारो,- को – ७


काज किये बड़ देवन के तुम ,

बीर महाप्रभु देखि बिचारो

कौन सो संकट मोर गरीब को ,

जो तुमसो नहिं जात है टारो

बेगि हरो हनुमान महाप्रभु ,

जो कछु संकट होए हमारो,-  को – ८


दोहा-

लाल देह लाली लसे , अरु धरि लाल लंगूर I

बज्र देह दानव दलन , जय जय जय कपि सूर II

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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