गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के आज खुले कपाट, जानें खास बातें
हिमालय की गोद में बसे 'हिमालय की चारधाम यात्रा' आज विधिवत् शुरू हुई।। दोपहर 12:15 पर गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुले। वहीं केदारनाथ के कपाट तीन मई को और बद्रीनाथ के कपाट छह मई को खुलेंगे। गंगोत्री धाम वहीं स्थान है, जिसे धरती पर अवतरित होते समय मां गंगा ने सबसे पहले छुआ था। यहां पर मां गंगा का मंदिर समुद्र तल से 3042 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। अगर आप भी इस बार गंगोत्री धाम जा रहे है तो उससे पहले वहां कि ये खास बातें जान लें, जो आपकी यात्रा आसान बनाने के साथ ही बेहद खास भी बना देंगे।
यह भी पढ़ें- अाज खुलेंगे गंगोत्री-यमुनोत्री के कपाट, जानिए क्या रहेगा शुभ मुहूर्त
- गंगोत्री धाम व यमुनोत्री धाम के कपाट हर वर्ष अक्षय तृतीया के दिन ही खुलते है और दीपावली के दिन कपाट बंद हो जाते हैं।
- पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम के पूर्वज रघकुल के चक्रवती राजा भागीरथ ने यहां पर एक शिलाखंड पर बैठकर भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। इस शिलाखंड के पास ही 18वीं सदीं में मंदिर का निर्माण किया गया।
- मां गंगा का यह मंदिर चमकदार सफेद ग्रेनाइट के 20 फीट ऊंचे पत्थरों से बना हुआ है।शिवलिंग के रूप में एक नैसर्गिक चट्टान भागीरथी नदी में जलमग्न है। शीतकाल के शुरुआत में जब गंगा का स्तर काफी नीचे चला जाता है तो इस शिवलिंग के दर्शन होते हैं।
- गंगोत्री शहर और मंदिर का इतिहास एक दूसरे में जुड़ा है। प्राचीन काल में यहां मंदिर नहीं था। भागीरथी शिला के पास एक मंच था, जहां यात्रा मौसम में तीन चार महीनों के लिए देवी देवताओं की मूतियों को रख दिया जाता था। इन मूर्तियों को गांवो के विभिन्न मंदिर श्याम प्रयाग, गंगा प्रयाग, धराली और मुखबा से लाया जाता था और यात्रा में बाद वापस लौटा दिया जाता था।
चावल व आलू चढ़ाते है मां यमुना को
- समुद्र तल से 3235 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवी यमुना के मंदिर के आसपास गर्मपानी के अनेक स्त्रोत है, जो अनेक कुंड में गिरते है। यहां आने वाले भक्त इसी गर्मपानी के कुंड में कपड़े की पोटली में चावल व आलू को बांधकर पकाते है और देवी को प्रसाद के रूप के अर्पित करते हैं।
- एक पौराणिक गाथा के अनुसार यह असित मुनी का निवास था। भूकम्प की वजह से यह बर्बाद हो गया था। वर्तमान मंदिर का निर्माण 19वीं में जयपुर की महारानी ने गुलेरिया ने करवाया था।
- गर्मपानी के कुंड में सूर्य कुंड सबसे प्रसिद्घ है और इस कुंड के नजदीक ही एक शिला है, जिसे दिव्य शाला के नाम से जाना जाता है। तीर्थयात्री देवी यमुना की पूजा करने से पहले इस दिव्य शिला की पूजा करते हैं।
- इस कुंड के पास ही जमुना बाई कुंड भी है, जिसका निर्माण कई सौ साल पहले हुआ था। पूजा करने से पहले इस कुंड में पवित्र स्नान किया जाता है।