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Ganga Saptami 2026: क्यों खास है गंगा सप्तमी ? जानें इससे जुड़ी मान्यताएं और रहस्य
Thu, 23 Apr 2026 12:05 PM IST
Vinod Shukla
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Thu, 23 Apr 2026 12:05 PM IST
सार
Ganga Saptami 2026: आज 23 अप्रैल को गंगा सप्तमी है जिसके विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं।
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गंगा सप्तमी की पौराणिक कथा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Ganga Saptami 2026: भारतीय संस्कृति में नदियों को केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि जीवनदायिनी और पूजनीय शक्ति यानि देवी के रूप में माना गया है। इनमें मां गंगा का स्थान सर्वोच्च है। वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाने वाली गंगा सप्तमी का पर्व विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं। इसलिए इस दिन को गंगा जयंती के रूप में भी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।
पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गंगा सप्तमी की कथा अत्यंत प्रेरणादायक और भक्तिभाव से परिपूर्ण है। कहा जाता है कि राजा सगर के 60 हजार पुत्र कपिल मुनि के श्राप से भस्म हो गए थे। उनके उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने मां गंगा को पृथ्वी पर अवतरित होने का वरदान दिया, ताकि उनके पवित्र जल से सगर पुत्रों की आत्मा को मुक्ति मिल सके।
लेकिन गंगा का वेग इतना प्रचंड था कि यदि वे सीधे पृथ्वी पर उतरतीं, तो धरती का संतुलन बिगड़ सकता था। तब भगवान शिव ने करुणावश अपनी जटाओं में गंगा को धारण किया और उनके वेग को नियंत्रित किया। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित किया। मान्यता है कि वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ही गंगा शिवजी की जटाओं में आईं, काफी समय तक शिव जटाओं में ही घूमती रहीं और गंगा दशहरा के दिन पृथ्वी पर उतरी।
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इस पावन दिन को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्र मानते हैं कि गंगा के पवित्र जल में स्नान करने से पापों का नाश होता है और आत्मा को शुद्धि प्राप्त होती है। जो लोग गंगा तट पर नहीं जा पाते, वे घर पर ही स्नान के बाद गंगाजल के छींटे लगा सकते हैं और मां गंगा का ध्यान करते हुए पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इस दिन जल से जुड़े दान, जैसे प्यासे लोगों को पानी पिलाना, शरबत या ठंडे पेय का वितरण करना, अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। साथ ही, दीपदान कर मां गंगा से सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना की जाती है।
गंगा सप्तमी हमें केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती है। आज गंगा नदी प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। ऐसे में यह पर्व हमें प्रेरित करता है कि हम नदियों की स्वच्छता और संरक्षण के लिए जागरूक रहें। गंगा को निर्मल और अविरल बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
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पौराणिक कथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गंगा सप्तमी की कथा अत्यंत प्रेरणादायक और भक्तिभाव से परिपूर्ण है। कहा जाता है कि राजा सगर के 60 हजार पुत्र कपिल मुनि के श्राप से भस्म हो गए थे। उनके उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने मां गंगा को पृथ्वी पर अवतरित होने का वरदान दिया, ताकि उनके पवित्र जल से सगर पुत्रों की आत्मा को मुक्ति मिल सके।
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लेकिन गंगा का वेग इतना प्रचंड था कि यदि वे सीधे पृथ्वी पर उतरतीं, तो धरती का संतुलन बिगड़ सकता था। तब भगवान शिव ने करुणावश अपनी जटाओं में गंगा को धारण किया और उनके वेग को नियंत्रित किया। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे गंगा को पृथ्वी पर प्रवाहित किया। मान्यता है कि वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन ही गंगा शिवजी की जटाओं में आईं, काफी समय तक शिव जटाओं में ही घूमती रहीं और गंगा दशहरा के दिन पृथ्वी पर उतरी।
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Ganga Saptami 2026: गंगा सप्तमी आज, करें इस चालीसा का पाठ, मिलेगी सभी कष्टों से मुक्ति
गंगा सप्तमी से जुड़ी विशेष मान्यताएंइस पावन दिन को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि गंगा सप्तमी के दिन मां गंगा की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना गया है। शास्त्र मानते हैं कि गंगा के पवित्र जल में स्नान करने से पापों का नाश होता है और आत्मा को शुद्धि प्राप्त होती है। जो लोग गंगा तट पर नहीं जा पाते, वे घर पर ही स्नान के बाद गंगाजल के छींटे लगा सकते हैं और मां गंगा का ध्यान करते हुए पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इस दिन जल से जुड़े दान, जैसे प्यासे लोगों को पानी पिलाना, शरबत या ठंडे पेय का वितरण करना, अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। साथ ही, दीपदान कर मां गंगा से सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना की जाती है।
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आस्था के साथ जुड़ा पर्यावरण संदेशगंगा सप्तमी हमें केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देती है। आज गंगा नदी प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। ऐसे में यह पर्व हमें प्रेरित करता है कि हम नदियों की स्वच्छता और संरक्षण के लिए जागरूक रहें। गंगा को निर्मल और अविरल बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।