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Dhanteras 2020: क्यों मनाया जाता है धनतेरस का त्योहार, जानिए पौराणिक कथा

Tue, 27 Oct 2020 12:20 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Tue, 27 Oct 2020 12:20 PM IST
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dhanteras 2020 dhanteras 2020 Why do we celebrate this festival know the story of Dhanteras
धनतेरस 2020: कार्तिक मास की त्रियोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस बार धनतेरस का त्योहार 13 नवंबर को है।

दीपावली का त्योहार धनतेरस के दिन से आरंभ हो जाता है। कार्तिक मास की त्रियोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। इस बार धनतेरस का त्योहार 13 नवंबर को है। इस दिन भगवान धनवंतरी की पूजा का प्रवाधान है। धनतेरस वाले दिन से ही दीपावली की खरीददारी शुरु हो जाती है। इस दिन बर्तन और नई चीजे खरीदने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन कुछ नया खरीदने से घर साल भर भरा-पूरा रहता है। जानते हैं कि कौन है भगवान धनवंतरि और धनतेरस मनाने की पौराणिक कथा क्या है। 

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दीपावली के दो दिन पहले धनतेरस पर भगवान धनंतरी की पूजा की जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन करने पर भगवान धनवंतरी अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। भगवान धनवंतरी को चिकित्सा का देवता माना जा्ता है। माता लक्ष्मी भी समुद्र मंथन से प्रकट हुई थी, इसलिए भगवान धनवंतरी के साथ मां लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है। धन से मान्यता है कि ये भगवान विष्णु का ही अंश हैं। धनतेरस के संबंध में एक और कथा मिलती है जो इस प्रकार है...

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जानते हैं धनतेरस की पौराणिक कथा
राजा बलि अत्यंत ही बलशाली और दानवीर राजा थे। वे भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। राजा बलि ने तीनों लोको पर अपना अधिकार कर लिया था। कथा के अनुसार देवताओं का सहायता करने हेतु विष्णु जी ने वामन अवतार लिया और राजा बलि की यज्ञ स्थल पर जाकर उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी। असुरों के गुरु शुक्राचार्य ने वामन के रूप में भगवान विष्णु को पहचान लिया। उन्होंने राजा बलि से दान देने के लिए मना किया, परंतु राजा बलि ने उनकी बात नहीं मानी। उसके बाद जैसे ही राजा बलि ने दान का संकल्प लेने के लिए जल का कमंडल अपने हाथों में लिया शुक्राचार्य लघु रुप धारण करके कमंडल में चले गए, जिससे कमंडल की टोटीं से जल न निकले। भगवान विष्णु शुक्राचार्य की चाल के समझ गए, उन्होंने अपने हाथ की कुशा को इस तरह से कमंडल में डाला कि उससे शुक्राचार्य की आंख फूट गई और वे कमंडल से बाहर आ गए। तब वामन अवतार भगवान विष्णु नें देखते ही देखते एक पग में पूरी पृथ्वी नाप ली और दूसरे पग में अंतरिक्ष नाप लिया। तीसरा पग रखने के लिए बलि ने अपना मस्तक भगवान के आगे कर दिया। जिससे देवताओं को सारा धन और संपत्ति वापस मिल गई। कहते हैं कि इसी उपलक्ष्य में धनतेरस का पर्व धूमधाम के साथ मनाया जाता है। 

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