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दक्षिणेश्वर मंदिर: ऐसा है मां काली का यह विश्वप्रसिद्ध मंदिर, 51 शक्तिपीठों में से है एक
Fri, 06 Nov 2020 05:42 PM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Fri, 06 Nov 2020 05:42 PM IST
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मां काली का प्रसिद्ध मंदिर
- फोटो : amar ujala
दक्षिणेश्वर मंदिर हिन्दू आस्था का प्रमुख केन्द्र है। यह कोलकाता के सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है, जिसकी मान्यता दुनियाभर में फैली है। इस मंदिर की मुख्य देवी, भवतारिणी हैं, जो हिन्दू देवी काली माता ही हैं। शुक्रवार को केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह इस मंदिर के दर्शन करने पहुंचे थे। आइए जानते हैं इस मंदिर के धार्मिक महत्व के बारे में-
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51 शक्तिपीठों में से एक है यह मंदिर
दक्षिणेश्वर काली मंदिर हुगली नदी के तट पर बसा है और यह मंदिर माता के 51 शक्तिपीठों में से हैं। मान्यताओं के अनुसार जब विष्णु भगवान ने मां सती के शव के टुकड़े किए थे तब इस स्थान पर माता की दाएं पांव की चार उंगलियां गिरी थीं। इस मंदिर को मां काली का दिव्य धाम भी कहा जाता है।
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नौ गुंबदों पर बना है यह मंदिर
भक्तों के लिए यह स्थान किसी सिद्ध स्थान से कम नहीं है। भारत के महानतम देवी तीर्थों में दक्षिणेश्वर काली मंदिर की गणना की जाती हैं। दक्षिणेश्वर काली मंदिर दो मंजिला मंदिर है और नौ गुंबदों पर बना हुआ है। इन गुंबदों पर खड़े लगभग सौ फीट ऊंचे मंदिर के गर्भगृह में मां काली की सुंदर मूर्ति है और यहां काली मां की मूर्ति लेटे हुए भगवान शिव की छाती पर खड़ी है।
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तांत्रिक गतिविधियों के प्रसिद्ध है यह मंदिर
दक्षिणेश्वर काली मंदिर के दर्शन के लिए सालभर भक्तजनों की भीड़ लगी रहती है। मां काली का यह मंदिर तांत्रिकों के लिए काफी महत्वपूर्ण तीर्थ है और उनका यहां साल भर आना-जाना लगा रहता है। वहीं यहां सैकड़ों तांत्रिक पूरे भारत से आ कर काली मां की पूजा करते हैं।
रामकृष्ण परमहंस की रही है कर्मभूमि
इस मंदिर को साल 1855 में जान बाजार की रानी रासमणि ने बनवाया था। यह मन्दिर, प्रख्यात दार्शनिक एवं धर्मगुरु, स्वामी रामकृष्ण परमहंस की कर्मभूमि रही है, जोकि बंगाली अथवा हिन्दू नवजागरण के प्रमुख सूत्रधारों में से एक, दार्शनिक, धर्मगुरु, और रामकृष्ण मिशन के संस्थापक, स्वामी विवेकानंद के गुरु थे। आज भी इस मंदिर के प्रांगण में स्वामी जी का कक्ष है।