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Chhath Puja 2021: आज है खरना, भूलकर भी ना करें ये गलतियां, जानिए कैसे ग्रहण करें प्रसाद
Tue, 09 Nov 2021 12:12 PM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमरउजाला
धर्म डेस्क, अमरउजाला
Published by: श्वेता सिंह
Updated Tue, 09 Nov 2021 12:12 PM IST
सार
आज छठ महापर्व का दूसरा दिन है, आज के दिन को खरना के नाम से जाना जाता है। हिन्दी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास कि पंचमी तिथि को करना होता है। खरना का महत्व इसलिए भी है क्योंकि व्रती इसमें दिनभर व्रत रखकर रात में प्रसाद ग्रहण करते हैं।
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खरना पर पूजा करतीं व्रती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आज छठ महापर्व का दूसरा दिन है, आज के दिन को खरना के नाम से जाना जाता है। हिन्दी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास कि पंचमी तिथि को करना होता है। खरना का महत्व इसलिए भी है क्योंकि व्रती इसमें दिनभर व्रत रखकर रात में प्रसाद ग्रहण करते हैं। खरना में गुड़ और चावल की खीर बनाकर भोग लगाया जाता है। खरना का प्रसाद बनाने के लिए आम की लकड़ी और मिट्टी के चूल्हे का प्रयोग किया जाता है।
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क्या है खरना का अर्थ
छठ में खरना का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रत करने वाले व्यक्ति छठ पूजा पूर्ण होने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करता है। छठ में खरना का अर्थ है शुद्धिकरण। यह शुद्धिकरण केवल तन न होकर बल्कि मन का भी होता है। इसलिए खरना के दिन केवल रात में भोजन करके छठ के लिए तन तथा मन को व्रती शुद्ध करता है। खरना के बाद व्रती 36 घंटे का व्रत रखकर सप्तमी को सुबह अघर्य देता है।
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कैसे ग्रहण करें प्रसाद
खरना प्रसाद बनाने में ही नहीं बल्कि ग्रहण करते समय भी नियम का ध्यान रखना होता है। खरना के दिन व्रत रखने वाला व्यक्ति प्रसाद ग्रहण करता है,तो घर के सभी सदस्य शांत रहते हैं और कोई शोर नहीं करता, क्योंकि शोर होने के बाद व्रती प्रसाद खाना बंद कर देता है। व्रत करने वाला सबसे पहले प्रसाद ग्रहण करता है, उसके बाद ही घर के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं।
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इन नियमों का पालन करना अनिवार्य
- छठ पूजा के व्रत की शुरुआत करते समय ध्यान रखें कि प्रसाद बनाते समय भी आप पवित्र हों।
- प्रसाद बनाते समय बीच में कुछ खाएं।
- सूर्य भगवान को अर्ध्य देने वाला पात्र तांबे या पीतल का हो।
- व्रत रख रही महिलाएं फर्श पर दरी या चादर बिछाकर सोएं।
- छठ पूजा का प्रसाद चूल्हे पर बनाएं और इसे ऐसी जगह पर बनाएं जहां रोजाना का खाना न बनता हो।
- छठ पूजा के दौरान घर में झगड़ा न करें। वरना छठी माता नाराज हो सकती हैं।
- सूर्य को अर्ध्य दिए बिना कुछ नहीं खाएं-पिएं।