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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   chhath puja 2020 date Know the importance of kharna on Chhath Puja

Chhath Puja 2020: छठ पूजा का दूसरा दिन, जानिए इस दिन खरना का महत्व और पूजा विधि

Thu, 19 Nov 2020 11:23 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Thu, 19 Nov 2020 11:23 AM IST
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chhath puja 2020 date Know the importance of kharna on Chhath Puja
Chhath Puja 2020 - फोटो : अमर उजाला

कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा बड़े ही धूमधाम के साथ पूरे देश में की जाती है। इस बार छठ की मुख्य पूजा 20 नवंबर को है। छठ का पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। पहले दिन नहाय खाय और दूसरे दिन यानि शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को खरना किया जाता है। इस दिन को लोहंडा भी कहते हैं। खरना का अर्थ होता है शुद्धिकरण... खरना वाले दिन छठ पूजा का विशेष प्रसाद बनाया जाता है। तो चलिए जानते हैं इस दिन का महत्व और पूजा विधि...

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खरना या लोहंडा का महत्व
खरना के दिन एक तरह से शुद्धिकरण की प्रक्रिया की जाती है। इस दिन महिलाएं और सभी व्रती दिन भर व्रत करते हैं। महिलाएं अपने हाथों से मिट्टी के नए चूल्हे पर छठी मइया के लिए प्रसाद तैयार करती हैं। खरना का प्रसाद बनाते समय शुद्धता का बहुत ध्यान रखा जाता है। इस दिन एक ही समय भोजन किया जाता है। छठी मइया और सूर्य भगवान को प्रसाद अर्पित करने के पश्चात 36 घंटे लंबा छठ का निर्जला व्रत आरंभ हो जाता है। जो सप्तमी तिथि को सुबह सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण किया जाता है। एक समय भोजन करने का अर्थ माना जाता है कि इससे तन के साथ मन भी शुद्ध रहता है। माना जाता है कि इस दिन से घर में छठी मइया का आगमन होता है।
 

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खरना की विधि
शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानि खरना के दिन व्रती महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करने के पश्चात सिंदूर लगाती है। सूर्य को अर्घ्य देने के पश्चात पूरे दिन व्रत किया जाता है। संध्या के समय चूल्हे पर साठी के चावलों और गुड़ से खीर का प्रसाद बनाकर तैयार किया जाता है। सूर्य और छठी मइया की पूजा करने के बाद इस प्रसाद को व्रत रखने वाले ग्रहण करते हैं और घर के सभी सदस्यों के प्रसाद को बांट दिया जाता है। इसके बाद सप्तमी तिथि निर्जला व्रत किया जाता है।

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