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Chaturmas 2024: शुरू होने वाला है चातुर्मास, चार माह के लिए बंद हो जाएंगे शुभ और मांगलिक कार्य

Mon, 01 Jul 2024 02:14 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 01 Jul 2024 02:14 PM IST
सार

हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि, जिसे देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है चातुर्मास की शुरुआत होती है।

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Chaturmas 2024 Start Date Kab Se Hai Chaturmas Works Will Not Be Done For 4 Months News in Hindi
Chaturmas 2024: चातुर्मास में भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में होते हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Chaturmas 2024: हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व होता है। चातुर्मास जिसका सामान्य अर्थ होता है चार महीने। चातुर्मास के चार महीने भगवान विष्णु को समर्पित होते हैं। धार्मिक कर्मकांड और ज्योतिषशास्त्र में चातुर्मास का खास महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि, जिसे देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है चातुर्मास की शुरुआत होती है। आइए जानते हैं इस वर्ष कब से चातुर्मास की शुरुआत होने जा रही है और इसका क्या महत्व है। 

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कब से शुरू होंगे चातुर्मास
हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से चातुर्मास की शुरुआत हो जाती है और इसका समापन देवउठनी एकादशी पर होता है। इस बार चातुर्मास की शुरुआत 17 जुलाई से हो रही है, वहीं देवउठनी एकादशी 12 नवंबर को है। चातुर्मास में भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योगनिद्रा में होते हैं।
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चातुर्मास का महत्व 
हिंदू धर्म में आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि से लेकर कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि तक का विशेष महत्व होता है। इस दौरान ही चातुर्मास लगता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के चार महीनों के लिए भगवान विष्णु क्षीरसागर में माता लक्ष्मी की साथ योग निद्रा में होते हैं। सनातन धर्म के अनुसार सृष्टि का संचालन भगवान विष्णु के हाथों में होता है, लेकिन चातुर्मास के दौरान चार महीनों के लिए भगवान विष्णु वैकुंठ धाम को छोड़कर पाताललोक में वास करते हैं। ऐसे में इस दौरान किसी  किसी भी तरह का कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य करना वर्जित होता है। 
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ऐसी मान्यता है कि चातुर्मास में भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने के कारण सृष्टि के संचालन का समस्त कार्यभार भगवान शिव के हाथों में आ जाता है। इसी कारण से जैसे ही चातुर्मास शुरू होता है, फिर आषाढ़ माह के समापन होते हैं श्रावण माह की शुरुआत होती है, जिसमें भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा आराधना होती है। भगवान विष्णु के योगनिद्रा में होने कारण सभी देवी-देवता भी योग निद्रा में चले जाते हैं।


चातुर्मास में क्या करें और क्या नहीं
भगवान विष्णु को न चढ़ाए जाने वाले खाद्य पदार्थ,मसूर,मांस,लोबिया,अचार, बैंगन, बेर, मूली, आंवला, इमली, प्याज और लहसुन इस अवधि के दौरान वर्जित माने जाते हैं। 
पलंग पर नहीं सोना चाहिए।
ऋतु काल के बिना स्त्रीगमन।
दूसरों का अन्न नहीं लेना चाहिए।
विवाह या अन्य शुभ कार्य।
चातुर्मास में चार माह अथवा कम से कम दो माह तो एक स्थान पर रहना चाहिए। 
चातुर्मास में साधना और आत्मसंयम का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
चातुर्मास में चावल,मूंग,जौ,तिल,मूंगफली,गेहूं ,समुद्र का नमक,गाय का दूध,दही,घी,कटहल,आम,नारियल, केला यह पदार्थ सेवन करने चाहिए।

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