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Chardham Yatra: यमुनोत्री से ही क्यों शुरू होती है चारधाम की तीर्थ यात्रा? क्या है इसके पीछे का धार्मिक कारण
Sat, 26 Apr 2025 11:09 AM IST
दीक्षा पाठक
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Sat, 26 Apr 2025 11:09 AM IST
सार
Yamunotri Dham: क्या आपको पता है कि इस यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से ही क्यों होता है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि चारधाम यात्रा की शुरुआत हमेशा यमुनोत्री से ही क्यों होती है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। आइए जानते हैं।
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चारधाम यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जैसे ही गर्मी का सीजन शुरू होता है। चारधाम यात्रा के फाटक खुल जाते हैं और लोग इस यात्रा के लिए पहले ही पंजीकरण करवा लेते हैं, जिससे बाद में उन्हें किसी भी परेशानी का सामना न करना पड़े। चारधाम यात्रा हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र मानी जाती है। यह यात्रा उत्तराखंड के चार पवित्र स्थानों की होती है। यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ से। हर साल लाखों लोग यह यात्रा करते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इस यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से ही क्यों होता है। तो आज की इस खबर में हम आपको बताने जा रहे हैं कि चारधाम यात्रा की शुरुआत हमेशा यमुनोत्री से ही क्यों होती है। इसके पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं। आइए जानते हैं।
यह है धार्मिक कारण
सबसे पहले बात करें धार्मिक कारण की। यमुनोत्री वह जगह है जहां से यमुना नदी निकलती है। हिन्दू धर्म में यमुना को देवी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि यमुना जी यमराज की बहन हैं। एक पुरानी मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति यमुनोत्री में स्नान करता है या दर्शन करता है, उसे मृत्यु के डर से छुटकारा मिल जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी वजह से भक्त इस यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से करना शुभ मानते हैं।
इसलिए रखा है यह क्रम
अब बात करते हैं भूगोल की। चार धामों में यमुनोत्री सबसे पश्चिम दिशा में स्थित है। जब यात्री यात्रा शुरू करते हैं तो वे पश्चिम से पूरब की ओर बढ़ते हैं। यह दिशा यात्रा के लिए सबसे सही मानी जाती है क्योंकि इससे रास्ता आसान और सुविधाजनक रहता है। पहाड़ी रास्तों में इस क्रम से चलना यात्रा को थकाऊ नहीं बनने देता और हर धाम तक पहुंचना थोड़ा सरल हो जाता है।
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पौराणिक मान्यताएं क्या कहती हैं?
एक और वजह है पुरानी परंपरा। पुराने समय में ऋषि-मुनि और साधु-संत भी यमुनोत्री से ही यात्रा की शुरुआत करते थे। उस समय से लेकर आज तक यही क्रम चलता आ रहा है। लोग इसे एक परंपरा मानकर निभाते हैं और इसी तरीके से यात्रा पूरी करते हैं। कहा जाता है कि यमुनोत्री से चार धाम यात्रा की शुरुआत करना सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक आस्था, समझदारी से चुनी गई दिशा, और वर्षों पुरानी श्रद्धा जुड़ी हुई है। यह यात्रा आत्मा को शुद्ध करने और भगवान के करीब लाने का एक सुंदर माध्यम है। इसलिए अगर आप भी चार धाम यात्रा करने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले यमुनोत्री की ही टिकट निकालें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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यह है धार्मिक कारण
सबसे पहले बात करें धार्मिक कारण की। यमुनोत्री वह जगह है जहां से यमुना नदी निकलती है। हिन्दू धर्म में यमुना को देवी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि यमुना जी यमराज की बहन हैं। एक पुरानी मान्यता के अनुसार, जो व्यक्ति यमुनोत्री में स्नान करता है या दर्शन करता है, उसे मृत्यु के डर से छुटकारा मिल जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी वजह से भक्त इस यात्रा की शुरुआत यमुनोत्री से करना शुभ मानते हैं।
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इसलिए रखा है यह क्रम
अब बात करते हैं भूगोल की। चार धामों में यमुनोत्री सबसे पश्चिम दिशा में स्थित है। जब यात्री यात्रा शुरू करते हैं तो वे पश्चिम से पूरब की ओर बढ़ते हैं। यह दिशा यात्रा के लिए सबसे सही मानी जाती है क्योंकि इससे रास्ता आसान और सुविधाजनक रहता है। पहाड़ी रास्तों में इस क्रम से चलना यात्रा को थकाऊ नहीं बनने देता और हर धाम तक पहुंचना थोड़ा सरल हो जाता है।
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पौराणिक मान्यताएं क्या कहती हैं?
एक और वजह है पुरानी परंपरा। पुराने समय में ऋषि-मुनि और साधु-संत भी यमुनोत्री से ही यात्रा की शुरुआत करते थे। उस समय से लेकर आज तक यही क्रम चलता आ रहा है। लोग इसे एक परंपरा मानकर निभाते हैं और इसी तरीके से यात्रा पूरी करते हैं। कहा जाता है कि यमुनोत्री से चार धाम यात्रा की शुरुआत करना सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक आस्था, समझदारी से चुनी गई दिशा, और वर्षों पुरानी श्रद्धा जुड़ी हुई है। यह यात्रा आत्मा को शुद्ध करने और भगवान के करीब लाने का एक सुंदर माध्यम है। इसलिए अगर आप भी चार धाम यात्रा करने की सोच रहे हैं तो सबसे पहले यमुनोत्री की ही टिकट निकालें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।