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Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   Annapurna Jayanti 2022 Today 8 December Puja Vidhi Muhurat And Importance

Annapurna Jayanti 2022: अन्नपूर्णा जयंती आज,माँ की कृपा से भरे रहते हैं धन-धान्य के भंडार

Thu, 08 Dec 2022 09:05 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 08 Dec 2022 09:05 AM IST
सार

धार्मिक मान्यता के अनुसार मां अन्नपूर्णा का वास घर की रसोई में माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि रसोई को कभी भी गंदी नहीं रखना चाहिए एवं थाली में झूठन छोड़कर कभी भी अन्न का अपमान नहीं करना चाहिए।

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Annapurna Jayanti 2022 Today 8 December Puja Vidhi Muhurat And Importance
Annapurna Jayanti 2022: मार्गशीर्ष पूर्णिमा को माता पार्वती ने सृष्टि के सभी जीवों के पोषण के लिए मां अन्नपूर्णा के रूप में अवतार लिया था

विस्तार

Annapurna Jayanti 2022: शास्त्रों के अनुसार,मार्गशीर्ष पूर्णिमा को माता पार्वती ने सृष्टि के सभी जीवों के पोषण के लिए मां अन्नपूर्णा के रूप में अवतार लिया था,इसलिए इस दिन को अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धापूर्वक विधि विधान से मां अन्नपूर्णा देवी की पूजा करने से घर में कभी भी धन-धान्य की कमी नहीं होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां अन्नपूर्णा का वास घर की रसोई में माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि रसोई को कभी भी गंदी नहीं रखना चाहिए एवं थाली में झूठन छोड़कर कभी भी अन्न का अपमान नहीं करना चाहिए। मां अन्नपूर्णा की कृपा से ही सृष्टि का भरण पोषण होता है। इस साल अन्नपूर्णा जयंती का व्रत गुरुवार,08 दिसंबर को रखा जाएगा।

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अन्नपूर्णा की पूजाविधि
इस दिन सुबह सबसे पहले रसोई घर को साफ-सुथरा करना चाहिए व गंगाजल छिड़क कर इसे पवित्र करें। अब रसोई घर की पूर्व दिशा में एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर इसके ऊपर नव धान्य की ढ़ेरी बनाकर इसके ऊपर मां अन्नपूर्णा की तस्वीर स्थापित करें और जल से भरे तांबे के कलश में अशोक या आम के पत्ते और नारियल रखें। अब घी का दीपक जलाकर सबसे पहले मां अन्नपूर्णा की रोली,अक्षत,मोली,पुष्प एवं फल आदि से पूजा करें। देवी की आरती कर मिठाई या मेवा से मां का भोग लगाएं और कथा सुनें।
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कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार पृथ्वी पर अन्न-जल का अकाल पड़ गया था। समस्त संसार में प्राणियों के जीवन पर संकट पैदा हो गया। लोग अन्न की कमी से भूखे मरने लगे। इस त्रासदी के कारण सभी ने ब्रह्मा एवं विष्णु भगवान की आराधना की और उनसे अपनी समस्या कही। तब ब्रह्मा और विष्णु ने शिवजी को योग निन्द्रा से जगाया और सम्पूर्ण समस्या से अवगत कराया। समस्या की गंभीरता को जान इसके निवारण के लिए स्वयं महादेव ने पृथ्वी का अवलोकन किया। उस समय माता पार्वती ने अन्नपूर्णा देवी का रूप लिया और इस प्रकार शिव जी ने अन्नपूर्णा देवी से चावल भिक्षा में मांगे और उन्हें भूखे पीढित लोगों के मध्य वितरित किया। इस प्रकार उस दिन से पृथ्वी पर अन्नपूर्णा जयंती का पर्व मनाया जाता है।

अन्नपूर्णा जयंती तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार,मार्गशीर्ष माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 07 दिसंबर 2022 को सुबह 08 बजकर 01मिनट से होगी। अगले दिन यानी की 08 दिसंबर 2022 को सुबह 09 बजकर 37 मिनट पर पूर्णिमा तिथि की समाप्ति है। उदया तिथि के अनुसार अन्नपूर्णा जयंती 8 दिसंबर 2022 को मनाई जाएगी।
 

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