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अधिकमास आरंभ, जानिए मलमास, पुरुषोत्तम मास, खरमास और चतुर्मास में अंतर

Fri, 18 Sep 2020 06:36 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Fri, 18 Sep 2020 06:36 AM IST
सार

  • इस बार अधिक मास 18 सितंबर से शुरू हो रहे हैं।
  • अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु को माना जाता है। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है।

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adhikmaas 2020 month start from 18 september know importance of adhikmaas malmaas purushottam and chaturmaas
अधिकमास 2020: अधिकमास के महीने का फैसला सूर्य संक्रांति के आधार पर किया जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस वर्ष अधिक मास लगने के कारण पितृपक्ष के खत्म होने के तुरंत बाद शारदीय नवरात्रि आरंभ नहीं होंगे, बल्कि नवरात्रि करीब एक महीने के बाद शुरू होंगे। अधिक मास 18 सितंबर से शुरू होगा जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। हिंदू धर्म में सभी व्रत और त्योहार तिथियों के अनुसार ही मनाए जाते हैं। ऐसे में अधिक मास को समझना बहुत जरूरी हो जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सभी तीज-त्योहार चंद्रमास को तय होते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं आखिरकार अधिक मास, पुरुषोत्तम मास, खरमास और मलमास क्या होता हैं और इसका क्या महत्व है...

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अधिक मास क्या होता है

इस बार अधिक मास 18 सितंबर से शुरू हो रहे हैं। ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य का सभी बारह राशियों के भ्रमण में जितना समय लगता है उसे सौरवर्ष कहा गया है जिसकी अवधि 365 दिन 6 घंटे की होती है। इन्हीं राशियों का भ्रमण चंद्रमा प्रत्येक माह करते हैं। चन्द्र एक वर्ष में प्रत्येक राशि का भ्रमण 12 बार करते हैं जिसे चांद्र वर्ष कहा जाता है। चंद्रमा का यह वर्ष 354 दिन और लगभग 09 घंटे का होता है जिसके परिणाम स्वरुप सूर्य और चन्द्र के भ्रमण काल में एक वर्ष में 10 दिन से भी अधिक का समय लगता है। इस तरह सूर्य और चन्द्र के वर्ष का समीकरण ठीक करने के लिए अधिक मास का जन्म हुआ। अधिकमास के महीने का फैसला सूर्य संक्रांति के आधार पर किया जाता है। कहने का मतलब यह है कि जिस माह सूर्य संक्रांति नहीं होती वह मास अधिक मास कहलाता है।

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पुरुषोत्तम मास किसे कहते हैं

हिंदू धर्म और पंचांग में एक नाम पुरुषोत्तम मास का लिया जाता है। दरअसल अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु को माना जाता है। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का ही एक नाम है। इसीलिए अधिकमास को पुरुषोत्तम मास के नाम से भी पुकारा जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस मास में जो भगवान विष्णु का पूजन करता है उसे कई गुना फल की प्राप्ति होती है।

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मल मास का अर्थ

मल मास जैसे कि नाम से ही स्पष्ट हो रहा है कि मलमास का महीना यानी मलिन महीना। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास के अलावा मलमास के नाम भी जाना जाता है। ऐसे में अधिकमास में सभी तरह के शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। इस कारण से इसे मलमास भी कहते हैं।

शास्त्रों में मलमास की कथा

यस्मिन मासे न संक्रान्ति, संक्रान्ति द्वयमेव वा। मलमासः स विज्ञेयो मासे त्रिंशत्त्मे भवेत।। अर्थात जिस चन्द्रमास में संक्रांति न पड़ती हो उसे मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं | ऐसे में इस साल 18 सितंबर से 16 अक्तूबर तक की अवधि के मध्य सूर्य संक्रांति न पड़ने से आश्विन में अधिकमास होगा। प्राचीन काल में काल गणना के समय से ही अधिक मास का तिरस्कार किया जाने लगा तथा शुभ कार्यों से इनको वंचित कर दिया गया। जिससे परेशान होकर मलमास भगवान विष्णु के पास गये और और बोले हे परमेश्वर ! मै अधिकमास हूं। इसमें मेरा क्या दोष है। मैं तो आप ही के विधान से बना हूं फिर मुझे यज्ञ आदि जैसे मांगलिक कर्मो से क्यों वंचित किया जाता है।

मलमास को मिला भगवान विष्णु का वरदान

मलमास की बातें सुनकर प्रभु विष्णु बोले कि हे मलमास तुम निराश मत हो मैं तुम्हे वरदान देता हूं कि जो तुम्हारे इस मास में मेरा भजन-पूजन करेगा और मेरी अमृतमयी श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा को सुनेगा या कहेगा उसे मेरा उत्तमलोक प्राप्त होगा, यहां तक कि जिस घर में यह महापुराण केवल मलमास की अवधि के मध्य तक ही रहेगा उस घर में दुख और दारिद्रय का प्रवेश कदापि नहीं होगा।  इसी क्षण से मै अपना श्रेष्ट नाम 'पुरुषोत्तम' तुम्हें प्रदान करता हूँ।  तभी से पुरुषोत्तम मास को मलमास के नाम से भी जाने लगा।

खरमास क्या होता है

आमतौर पर लोग खरमास और मलमास के अंतर को नहीं समझ पाते हैं ऐसे में मलमास को ही खरमास समझ लेते हैं जो सही नहीं है। सूर्य के धनु या मीन राशि में गोचर करने की अवधि को ही खरमास कहते हैं।

चतुर्मास का महत्व

देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसलिये इन चार महीनों को चतुर्मास कहा जाता है। धार्मिक कार्यों, ध्यान, भक्ति आदि के लिए यह समय श्रेष्ठ माना जाता है। चतुर्मास आषाढ़ माह की शुक्ल पक्ष एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को समाप्त होता है। चतुर्मास में मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। चतुर्मास में विवाह या अन्य संस्कार, गृह प्रवेश जैसे अन्य मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। 
 

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