विदुर बहुत ही विद्वान थे। महाभारत काल में वे हस्तिनापुर के प्रधानमंत्री और कौरवों व पांडवो के काका थे। राजा पुत्र होने पर भी उन्हें राजकाज नहीं सौंपा गया, क्योंकि उनका जन्म ऋषि वेदव्यास के आशीर्वाद से एक दासी के गर्भ से हुआ था। लेकिन ऋषि वेदव्यास के आशीर्वाद के कारण वे अत्यंत बुद्धिमान और विद्वान थे। विदुर नीति में कई अच्छी बातें बताई गई हैं। विदुर नीति के अनुसार धन का सही प्रबंधन और सही तरह से निवेश करना बहुत महत्वपूर्ण है। अगर धन का प्रबंधन सही तरह से किया जाए और सही से उसका निवेश किया जाए तो अवश्य ही लाभ मिलता है और धन में बढ़ोत्तरी होती है।
विदुर नीति: इस तरह से करें अर्थ प्रबंधन, फिर कभी नहीं होगी धन की कमी
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विदुर नीति के अनुसार अच्छे या मंगल कर्म करने से लक्ष्मी वास करती हैं। अर्थात् हमेशा ईमानदारी और मेहनत से किए गए कामों से ही प्राप्त होता है। धन का संतुलन बनाने के लिए आय और व्यय सही तरह से किया जाना चाहिए और धन के हमेशा सही से सोच समझ कर उपयोग किया जाना चाहिए। इससे धन की बचत होती है और बढ़ोत्तरी भी होती है। धन को सदैव सही और आय बढ़ाने वाले कार्यों में लगाना चाहिए। तभी धन बढ़ता है। धन का प्रबंधन और निवेश अगर सही तरह से किया जाए तो निश्चित ही लाभ होता है।
विदुर नीति के अनुसार धन का बचाव तभी हो सकता है जब मानसिक,शारीरिक एवं वैचारिक संयम बरता जाए। मतलब धन को शौक पूरा करने या बिना आवश्यकता के भौतिक सुखो की पूर्ति के लिए धन का गलत तरह से व्यय नहीं करना चाहिए। धन तभी खर्च करना चाहिए जब आवश्यकता हो।
विदुर नीति के अनुसार अगर व्यक्ति धन धान्य से परिपूर्ण है तो उसे दान अवश्य करना चाहिए। यह जीवन में सबसे बड़ा पुण्य होता है। दान करने वाले व्यक्ति का मान-सम्मान बढ़ता है। धन को बढ़ाने के लिए दान करना भी आवश्यक है, नहीं तो धन रखे रखे ही बर्बाद हो जाता है।
विदुर नीति में यह भी बताया गया है कि जो व्यक्ति न तो धन का सही तरह से भोग करता है, और न ही उसका दान करता है, तो ऐसे धन का नाश होना निश्चित होता है इसलिए घना का दान करना और उसे बुद्धिपूर्वक उपभोग करना आवश्यक होता है। एक जगह ठहरे हुए धन की आयु बहुत कम होती है।