Vasant Panchami 2020: वसंत पंचमी पर इस मुहूर्त में करें मां सरस्वती की पूजा
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वसंत पंचमी का पर्व ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती के प्रतीक स्वरूप पुस्तक और लेखनी की पूजा का विधान है। माता सरस्वती को ज्ञान, संगीत, कला, विज्ञान और शिल्प कला की देवी माना जाता है। इस दिन को श्रीपंचमी और सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। स्नान के बाद दानपुण्य किया जाता है।
वसंत पंचमी 2020 कब है (vasant panchami 2020 date and time) ?
वसंत पंचमी का पर्व बुधवार 29 जनवरी 2020 को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित वसंत पंचमी का त्योहार प्रति वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को वसंत पंचमी पर्व मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 29 जनवरी को पड़ रही है।
वसंत पंचमी 2020 पूजा मुहूर्त
29 जनवरी 2020 बुधवार को सुबह 10:47:38 से दोपहर 12:34:23 बजे तक
मुहूर्त की समयाधि :1 घंटे 46 मिनट
वसंत पंचमी तिथि को लेकर शास्त्रों में नियम
यदि पंचमी तिथि मध्याह्न के बाद शुरू हो रही है तो ऐसी स्थिति में वसंत पंचमी की पूजा अगले दिन की जाएगी। हालाँकि यह पूजा अगले दिन उसी स्थिति में होगी जब तिथि का प्रारंभ पहले दिन के मध्य से पहले नहीं हो रहा हो, अर्थात पंचमी तिथि पूर्वाह्नव्यापिनी न हो। बाक़ी सभी परिस्थितियों में पूजा पहले दिन ही होगी।
वसंत पंचमी 2020 की पूजा विधि (Vasant Panchami 2020 Puja Viddhi)
- सुबह स्नानादि कर पीले वस्त्र धारण करें।
- मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें।
- सबसे पहले कलश स्थापित कर भगवान गणेश व नवग्रह की विधिवत पूजा करें, फिर मां सरस्वती की पूजा करें।
- आचमन व स्नान कराएं, फिर माता का श्रृंगार कर उन्हें श्वेत वस्त्र धारण करें।
- प्रसाद के रूप में खीर अथवा दूध से बनी मिठाई अर्पित करें।
- श्वेत फूल माता को अर्पण करें।
- संगीत से जुड़े लोग अपने माथे पर तिलक लगाकर मां की आराधना कर सकते हैं व मां को बांसुरी भेंट करें।
ऐसी शुरू हुई वसंत पंचमी में पूजा
मान्यता है कि जब सरस्वती देवी प्रकट हुईं तो भगवान श्रीकृष्ण को देखकर उन पर मोहित हो गईं और उनसे पत्नी रूप में स्वीकारने का अनुरोध किया। पर श्रीकृष्ण ने राधा के प्रति समर्पण जताते हुए मां सरस्वती को वरदान दिया कि आज से माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को समस्त विश्व तुम्हारी विद्या व ज्ञान की देवी के रूप में पूजा करेगा। उसी समय भगवान श्रीकृष्ण ने सबसे पहले देवी सरस्वती की पूजा की। तब से लेकर निरंतर वसंत पंचमी के दिन उनकी पूजा अर्चना लोग करते आ रहे हैं।