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18 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी व्रत, जानिए इस एकादशी व्रत की कथा
Fri, 17 Apr 2020 07:26 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 17 Apr 2020 07:26 AM IST
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वरूथिनी एकादशी व्रत की कथा
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सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हर महीने की शुक्ल और कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। वैशाख महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरुथिनी एकादशी कहते हैं। इस बार यह एकादशी 18 अप्रैल, शनिवार के दिन पड़ रही है। एकादशी व्रत में भगवान विष्णु का ध्यान करने से प्रभु का आशीर्वाद मिलता है। पुराणों में ऐसी मान्यता है कि वरुथनी एकादशी का व्रत रखने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
वरूथिनी एकादशी व्रत की कथा
नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम के राजा की राज था। राजा की रुचि हमेशा धार्मिक कार्यों में रहती थी। वह हमेशा पूजा-पाठ में लीन रहते थे। एक बार राजा जंगल में तपस्या में लीन थे तभी एक जंगली भालू आया और राजा का पैर चबाने लगा। राजा इस घटना से तनिक भी भयभीत नहीं हुए और उनके पैर को चबाते हुए भालू राजा को घसीटकर पास के जंगल में ले गया। तब राजा मान्धाता ने भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगे। राजा की पुकार सुनकर भगवान विष्णु प्रकट ने चक्र से भालू को मार डाला।
राजा का पैर भालू खा चुका था और वह इस बात को लेकर वह बहुत परेशान हो गए। दुखी भक्त को देखकर भगवान विष्णु बोले- 'हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करों। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगो वाले हो जाओगे। इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था। भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और संपूर्ण अंगो वाला हो गया।
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वरुथिनी एकादशी व्रत मुहूर्त (Varuthini Ekadashi 2020 Muhurat)
एकादशी तिथि प्रारंभ: 17 अप्रैल को रात्रि 08:07 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 18 अप्रैल को रात 10:19 बजे तक
वरुथिनी एकादशी पारण मुहूर्त: 19 अप्रैल को सुबह 05:51 से 08:26 बजे तक
अवधि: 2 घंटे 35 मिनट
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वरूथिनी एकादशी व्रत की कथा
नर्मदा नदी के तट पर मान्धाता नाम के राजा की राज था। राजा की रुचि हमेशा धार्मिक कार्यों में रहती थी। वह हमेशा पूजा-पाठ में लीन रहते थे। एक बार राजा जंगल में तपस्या में लीन थे तभी एक जंगली भालू आया और राजा का पैर चबाने लगा। राजा इस घटना से तनिक भी भयभीत नहीं हुए और उनके पैर को चबाते हुए भालू राजा को घसीटकर पास के जंगल में ले गया। तब राजा मान्धाता ने भगवान विष्णु से प्रार्थना करने लगे। राजा की पुकार सुनकर भगवान विष्णु प्रकट ने चक्र से भालू को मार डाला।
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राजा का पैर भालू खा चुका था और वह इस बात को लेकर वह बहुत परेशान हो गए। दुखी भक्त को देखकर भगवान विष्णु बोले- 'हे वत्स! शोक मत करो। तुम मथुरा जाओ और वरुथिनी एकादशी का व्रत रखकर मेरी वराह अवतार मूर्ति की पूजा करों। उसके प्रभाव से पुन: सुदृढ़ अंगो वाले हो जाओगे। इस भालू ने तुम्हें जो काटा है, यह तुम्हारे पूर्व जन्म का अपराध था। भगवान की आज्ञा मानकर राजा ने मथुरा जाकर श्रद्धापूर्वक यह व्रत किया। इसके प्रभाव से वह सुंदर और संपूर्ण अंगो वाला हो गया।
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वरुथिनी एकादशी व्रत मुहूर्त (Varuthini Ekadashi 2020 Muhurat)
एकादशी तिथि प्रारंभ: 17 अप्रैल को रात्रि 08:07 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त: 18 अप्रैल को रात 10:19 बजे तक
वरुथिनी एकादशी पारण मुहूर्त: 19 अप्रैल को सुबह 05:51 से 08:26 बजे तक
अवधि: 2 घंटे 35 मिनट