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Varalakshmi Vratham Vrat: वरलक्ष्मी व्रत आज, परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है उपवास
Fri, 31 Jul 2020 11:39 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Fri, 31 Jul 2020 11:39 AM IST
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Goddess Laxmi
- फोटो : Social Media
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Varalakshmi vratam puja vidhi आज यानी 31 जुलाई को वरलक्ष्मी व्रत किया जा रहा है। हिंदू धर्म में व्रत और उपवास का विशेष महत्व होता है। वरलक्ष्मी व्रत माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। यह व्रत विवाहित महिलाएं करती हैं। वरलक्ष्मी व्रत मुख्य रूप से दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में रखा जाता है। वरलक्ष्मी व्रत में विवाहित महिलाएं अपने पति, बच्चों और परिवार से अन्य सदस्यों की मंगलकामना के लिए दिनभर उपवास रहकर मां लक्ष्मी की पूजा आराधना करती हैं।
वरलक्ष्मी पूजन सामग्री
वरलक्ष्मी पूजा में विवाहित महिलाएं कठिन उपवास रखने के साथ इनकी अलग तरह से पूजा होती है। पूजन सामग्री में मां वरलक्ष्मी की प्रतिमा, कुमकुम, हल्दी, चंदन, माला फूल, पान के पत्ते, अक्षत के साथ श्रृंगार की सभी सामग्रियों को शामिल किया जाता है।
वरलक्ष्मी पूजा विधि
वरलक्ष्मी का त्योहार मुख्य रूप से दक्षिणभारत के हिस्सों में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। वरलक्ष्मी व्रत में सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई की जाती है। पूजास्थल को सजाया जाता है और गंगाजल से सभी जगहों को शुद्ध किया जाता है और व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद मां वरलक्ष्मी की प्रतिमा या मूर्ति को नए कपड़े पहनाएं जाते हैं और उनका श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद मां लक्ष्मी की मूर्ति के पास भगवान गणेश की प्रतिमा रखी जाती है। इसके बाद कलश और अक्षत से वरलक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। इसके बाद पूजन सामग्री की सभी चीजों को वरलक्ष्मी को अर्पित किया जाता है। इसके बाद आरती से मां को प्रसन्न कर वरलक्ष्मी व्रत कथा का पाठ किया जाता है। इसके बाद मां को भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया जाता है।
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वरलक्ष्मी व्रत मंत्र
पद्यासने पद्यकरे सर्व लोकैक पूजिते।
नारायणप्रिये देवी सुप्रीता भव सर्वदा।।
देवी लक्ष्मी के वरलक्ष्मी का अवतार क्षीर सागर से हुआ है। वरलक्ष्मी का रंग दुधिया महासागर की भांति है। मां वरलक्ष्मी 16 श्रृंगार कर सजी रहती हैं। माता लक्ष्मी का यह रूप और नाम भक्तों की सभी मनोकामनओं को पूरा करने वाला माना गया है। इस कारण से इन्हें वरलक्ष्मी कहा गया है। जो भी भक्त मां लक्ष्मी की पूजा और उपवास रख भक्तिभाव से पूजा आराधना करता है उसके परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है।
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वरलक्ष्मी पूजन सामग्री
वरलक्ष्मी पूजा में विवाहित महिलाएं कठिन उपवास रखने के साथ इनकी अलग तरह से पूजा होती है। पूजन सामग्री में मां वरलक्ष्मी की प्रतिमा, कुमकुम, हल्दी, चंदन, माला फूल, पान के पत्ते, अक्षत के साथ श्रृंगार की सभी सामग्रियों को शामिल किया जाता है।
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वरलक्ष्मी पूजा विधि
वरलक्ष्मी का त्योहार मुख्य रूप से दक्षिणभारत के हिस्सों में मनाया जाने वाला प्रमुख त्योहार है। वरलक्ष्मी व्रत में सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई की जाती है। पूजास्थल को सजाया जाता है और गंगाजल से सभी जगहों को शुद्ध किया जाता है और व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद मां वरलक्ष्मी की प्रतिमा या मूर्ति को नए कपड़े पहनाएं जाते हैं और उनका श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद मां लक्ष्मी की मूर्ति के पास भगवान गणेश की प्रतिमा रखी जाती है। इसके बाद कलश और अक्षत से वरलक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। इसके बाद पूजन सामग्री की सभी चीजों को वरलक्ष्मी को अर्पित किया जाता है। इसके बाद आरती से मां को प्रसन्न कर वरलक्ष्मी व्रत कथा का पाठ किया जाता है। इसके बाद मां को भोग लगाकर प्रसाद का वितरण किया जाता है।
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वरलक्ष्मी व्रत मंत्र
पद्यासने पद्यकरे सर्व लोकैक पूजिते।
नारायणप्रिये देवी सुप्रीता भव सर्वदा।।
देवी लक्ष्मी के वरलक्ष्मी का अवतार क्षीर सागर से हुआ है। वरलक्ष्मी का रंग दुधिया महासागर की भांति है। मां वरलक्ष्मी 16 श्रृंगार कर सजी रहती हैं। माता लक्ष्मी का यह रूप और नाम भक्तों की सभी मनोकामनओं को पूरा करने वाला माना गया है। इस कारण से इन्हें वरलक्ष्मी कहा गया है। जो भी भक्त मां लक्ष्मी की पूजा और उपवास रख भक्तिभाव से पूजा आराधना करता है उसके परिवार में सुख और समृद्धि का वास होता है।