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ईद अल्लाह का शुक्रिया अदा करने का दिन है
जेबुन्निसा
Updated Sat, 09 Jun 2018 10:18 AM IST
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रमजान उल मुबारक के महीने (लगभग पूरे महीने रोजा रखने और दान पुण्य करने) के बाद मुसलमान मजहबी खुशी का त्योहार मनाते हैं। ईद उल-फितर नाम का यह त्योहार रमजान का महीना पूरा होने के बाद साल के दसवें महीने शव्वाल के पहले दिन होता है।
पहला ईद उल-फितर पैगम्बर मुहम्मद ने सन 624 ईसवी में जंग-ए-बदर के बाद मनाया था। उपवास की समाप्ति पर खुशी के अलावा ईद अल्लाह का शुक्रिया अदा करने का दिन भी है।ईद में मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा इसलिए भी करते हैं कि उन्होंने महीने भर का उपवास रखने की शक्ति दी।
नए कपड़े पहनना और परिजनों और दोस्तों के बीच तोहफों का आदान-प्रदान करना ईद का खास हिस्सा है। सेवइयां इस त्योहार की जरूरी खाद्य पदार्थ हैं।मस्जिदों में सुबह की नमाज से पहले इस दिन दान या तोहफा देना जरूरी है।इसे जकात उल-फितर कहते हैं। इस दिन लोग अपने घरेलू और आपसी झगड़ों को भी सुलह सफाई के साथ निबटा लेते हैं।
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पहला ईद उल-फितर पैगम्बर मुहम्मद ने सन 624 ईसवी में जंग-ए-बदर के बाद मनाया था। उपवास की समाप्ति पर खुशी के अलावा ईद अल्लाह का शुक्रिया अदा करने का दिन भी है।ईद में मुसलमान अल्लाह का शुक्रिया अदा इसलिए भी करते हैं कि उन्होंने महीने भर का उपवास रखने की शक्ति दी।
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नए कपड़े पहनना और परिजनों और दोस्तों के बीच तोहफों का आदान-प्रदान करना ईद का खास हिस्सा है। सेवइयां इस त्योहार की जरूरी खाद्य पदार्थ हैं।मस्जिदों में सुबह की नमाज से पहले इस दिन दान या तोहफा देना जरूरी है।इसे जकात उल-फितर कहते हैं। इस दिन लोग अपने घरेलू और आपसी झगड़ों को भी सुलह सफाई के साथ निबटा लेते हैं।
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