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सोमवती अमावस्याः इन दिन न कर सकें पूजा पाठ तो करें जरूर ये काम
पंडित गोविन्द कृष्ण वत्स
Updated Sat, 16 Dec 2017 08:55 AM IST
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जिस तरह देवताओं के पूजन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, उसी तरह पितरों का पूजन भी जीवन में कृपा बरसाने वाला होता है। देवताओं के लिए जहां पूर्णमासी महत्वपूर्ण तिथि मानी गई है, तो वहीं पितरों के लिए अमावस्या का दिन शुभ माना गया है। अमावस यदि सोमवार के दिन हो तो महत्व और भी बढ़ जाता है।
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चंद्रमा मन का स्वामी है। यह मनोबल बढ़ाने और पितरों का अनुग्रह प्राप्त कराने में सबसे ज्यादा सहायक होता है। पितर या पूर्वज, जगत में आपका सहयोग करने वाली सबसे घनिष्ठ सहयोगी अशरीरी सत्ता हैं। यह तिथि उनके प्रति अनुग्रह प्राप्त करने के लिए उपयुक्त अवसर है। अमावस्या उनके प्रति आभार व्यक्त करने का खास मौका इसलिए भी है कि सूर्य की सहस्र किरणों में प्रमुख अमा नाम की किरण, इस दिन चन्द्रमा में निवास करती है, अमावस्या को इसलिए भी अक्षय फल देने वाली माना जाता है।
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सूर्य, चंद्र जब एक राशि में आते हैं और वह तिथि सोमवार को हो, तो तभी सोमवती अमावस्या का भी लाभ होता है। सोमवती अमावस्या को किए गए पूजा पाठ, अनुष्ठान पितरों के लिए हैं। जिन जातकों पर पितृ दोष होता है, वह शांति व सुख से वंचित रहते हैं। इस दिन पितरों को तृप्त कराने से पितर अपनी अनुकंपा बरसाते हैं। अगर विशेष पूजा-पाठ संभव नहीं है, तो इस दिन दान-पुण्य किया जा सकता है।
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