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Yogini Ekadashi 2019 : भगवान विष्णु के इस व्रत से दूर होता है अपयश और कुष्ठ रोगों से मिलती है मुक्ति
New Delhi, India
Published by: Madhukar Mishra
Updated Sat, 29 Jun 2019 08:35 AM IST
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योगिनी एकादशी व्रत 2019
- फोटो : Rohit Jha
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आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन भगवान विष्णु के निमित्त योगिनी एकादशी करने का विधान है। इस साल यह पावन तिथि 29 जून को पड़ रही है। परमेश्वर श्री विष्णु ने मानव कल्याण के लिए अपने शरीर से पुरुषोत्तम मास की एकादशियों को मिलाकर कुल छब्बीस एकादशियों को प्रकट किया।
गुणों के अनुरूप हुआ है नामकरण
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योगिनी एकादशी व्रत 2019
कृष्ण और शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली इन एकादशियों के नाम और उनके गुणों के अनुसार ही उनका नामकरण भी किया गया। सभी एकादशियों में नारायण समतुल्य फल देने का सामर्थ्य है। ये सभी अपने भक्तों की कामनाओं की पूर्ति कराकर उन्हें विष्णु लोक पहुंचाती हैं। इनमें 'योगिनी एकादशी' तो प्राणियों को उनके सभी प्रकार के अपयश और चर्म रोगों से मुक्ति दिलाकर जीवन सफल बनाने में सहायक होती है।
योगिनी एकादशी व्रत पूजा विधि
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योगिनी एकादशी व्रत 2019
इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ पीपल के वृक्ष की पूजा का भी विधान है। साधक को इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की मूर्ति को 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का उच्चारण करते हुए स्नान कराना चाहिए। इसके पश्चात् भगवान श्री विष्णु को वस्त्र, चन्दन, जनेऊ, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप, नैवेद्य, ताम्बूल आदि समर्पित करके आरती उतारनी चाहिए।
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इस पूजा से दूर होते हैं सभी पाप
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योगिनी एकादशी व्रत 2019
पद्म पुराण के अनुसार योगिनी एकादशी समस्त पातकों अर्थात् पापों का नाश करने वाली है। यह संसार सागर में डूबे हुए प्राणियों के लिए सनातन नौका के सामान है। यह देह की समस्त आधि-व्याधियों को नष्ट कर सुंदर रूप, गुण और यश देने वाली है। इस व्रत का फल 88 हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने के फल के समान है।
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श्री विष्णु के आशीर्वाद से दूर होता कुष्ठ रोग
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योगिनी एकादशी व्रत 2019
इस एकादशी के सन्दर्भ में भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को एक कथा सुनाई थी, जिसमें राजा कुबेर के श्राप से कोढ़ी होकर हेममाली नामक यक्ष मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुंचा। ऋषि ने योगबल से उसके दु:खी होने का कारण जान लिया और योगिनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी। यक्ष ने ऋषि की बात मान कर व्रत किया और दिव्य शरीर धारण कर स्वर्गलोक चला गया।
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