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Shradh Paksha 2020: पितृ पक्ष में इसलिए जरूरी है पितरों का आशीर्वाद पाना

Wed, 02 Sep 2020 09:12 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजालाx
धर्म डेस्क, अमर उजालाx Published by: रुस्तम राणा Updated Wed, 02 Sep 2020 09:12 AM IST
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Shradh Paksha 2020 Know why shradh important to us
पितृ पक्ष 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

सुखी जीवन के लिए पितृ पक्ष में पूर्वजों का आशीर्वाद लेना जरूरी होता है। श्राद्ध पक्ष 2 सितंबर से शुरू हो गए हैं जो 17 सितंबर को समाप्त होंगे। श्राद्ध में पूर्वजों का आशीर्वाद पाने के लिए उनके निमित्त श्रद्धा पूर्वक तर्पण करने का महत्व है। पूर्वजों के आशीर्वाद से ही व्यक्ति सुखी जीवन की कामना कर सकता है। इसलिए कहा जाता है कि पितृपक्ष में अपने पूर्वजों की कभी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। क्योंकि उनका अनादर हमारे लिए कष्टकारी होता है। श्राद्ध से जुड़ी इस पौराणिक कथा के माध्यम से इस बात को समझा जा सकता है।

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कहते हैं जोगे और भोगे नाम के दो भाई थे। दोनों अलग-अलग घरों में रहा करते थे। जोगे के पास धन की कोई कमी न थी, लेकिन भोगे निर्धन था। दोनों भाई एक दूसरे से बहुत प्रेम करते थे। लेकिन जोगे की पत्नी को धन का अभिमान था, तो वहीं भोगे की पत्नी सुशील और शांत स्वाभाव की थी। जब पितृ पक्ष आने पर जोगे की पत्नी ने उससे पितरों का श्राद्ध करने के लिए कहा तो जोगे इसे व्यर्थ का कार्य समझकर टालने की कोशिश की, लेकिन जोगे की पत्नी केवल अपनी शान दिखाने के लिए श्राद्ध का कार्यक्रम रखना चाहती थी। ताकि वह अपने मायके पक्ष के लोगों को बुलाकर दावत कर सके। पत्नी ने जोगे से कहा कि मुझे कोई परेशानी न हो इसलिए आप ऐसा कह रहे हैं। लेकिन मैं सत्य कहती हूं, मुझे इसमें कोई परेशानी नहीं है, मैं भोगे की पत्नी को बुला लूंगी। हम दोनों मिलकर सारा काम कर लेंगे।

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श्राद्ध पक्ष 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

दूसरे दिन भोगे की पत्नी सुबह आकर सारा कार्य करवाने लगी, उसने अनेक पकवान बनाए, फिर सभी काम निपटाने के बाद अपने घर वापस आ गई, क्योंकि उसे भी पितरों का तर्पण करना था। जब पितर भूमि पर उतरे जब वे जोगे के यहां गए तो देखा कि उसके ससुराल पक्ष के सभी लोग भोजन पर जुटे हुए हैं। वहां ये सब देखकर वे बहुत निराश हुए उसके बाद जब पितर भोगे के यहां गए, तो देखते हैं कि मात्र पितरों के नाम पर केवल अगियारी दे दी गई है। पितर उसकी राख चाटते हैं, और भूखे ही नदी के तट पर पहुंच जाते हैं।

कुछ ही देर में सारे पितर अपने-अपने यहां का श्राद्ध ग्रहण करके इकट्ठे हो गए और बताने लगे कि उनकी संतानों ने किस-किस तरह से उनके लिए श्राद्ध के पकवान बनाए। जोगे-भोगे के पितरों ने भी अपनी आप बीती सुनाई। उन्होंने सोचा कि अगर भोगे निर्धन न होता और श्राद्ध करने में समर्थ होता तो शायद उन्हें भूखा वापस नहीं आना पड़ता, क्योंकि भोगे के घर में तो खाने के लिए भी दो जून की रोटी नहीं थी। ये सारी बातें सोचकर पितरों को भोगे पर दया आ गई। अचानक से वे नाच-नाचकर गाने लगे कि भोगे के घर धन हो जाए, भोगे के घर धन हो जाए।

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श्राद्ध 2020 - फोटो : सोशल मीडिया

सांझ का समय हो चला था, लेकिन भोगे के घर में खाने को कुछ भी नहीं था। उसके बच्चे भूखे थे। बच्चों ने अपनी मां से कहा कि भूख लगी है। तब उन्हें टालने के लिए गुस्से से गरज कर भोगे की पत्नी ने कहा कि जाओ आंगन में हौदी औंधी रखी है, उसे जाकर खोल लो उसमें जो भी मिल जाए आपस में बांटकर खा लेना। बच्चे जब वहां जाकर हौदी देखते हैं, तो वे दौड़े-दौड़े मां के पास जाकर कहते हैं कि मां हौदी तो मोहरों से भरी पड़ी है। आंगन में आकर भोगे की पत्नी जब यह सब कुछ देखती है, तो उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहता है।

इस तरह पितरों के आशीर्वाद से भोगे भी धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है, लेकिन वह इस बात का बिल्कुल अंहकार नहीं करता है, और अगले बरस पूरी श्रद्धा के साथ भोगे एवं उसकी पत्नी अपने पितरों का श्राद्ध करते हैं। भोगे की पत्नी पितरों के लिए 56 प्रकार के व्यंजन तैयार करती है, वे दोनों ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं, अपने जेठ-जेठानी को बुलाकर सम्मान के साथ सोने और चांदी के बर्तनों में भोजन कराते हैं। इससे उनके पितर बहुत प्रसन्न होते हैं। 

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