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Mahashivratri 2019 : जानें किस मनोकामना के लिए किस शिवलिंग की करनी चाहिए पूजा

Fri, 01 Mar 2019 05:50 PM IST
Madhukar Mishra अनीता जैन, वास्तुविद्
अनीता जैन, वास्तुविद् Published by: Madhukar Mishra Updated Fri, 01 Mar 2019 05:50 PM IST
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shivling puja will fulfill your all wishes on mahashivratri
Mahashivratri 2019
शास्त्रों का कथन है कि 'शिवः अभिषेक प्रियः' अर्थात् कल्याणकारी शिव को अभिषेक अत्यंत प्रिय है। समस्त मनोरथों को पूर्ण करने की शक्ति शिवलिंग के अभिषेक में समाहित है। ब्रह्म का विग्रह रूप ही शिव हैं। ''रुतम्-दुःखम् द्रावयति-नाशयतीति रुद्रः' यानि भगवान शिव सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं। ईश्वर, शिव, रूद्र, शंकर, महादेव आदि सभी ब्रह्म के ही पर्यायवाची शब्द हैं। इनमें सतोगुण सृष्टि के पालक श्री विष्णु एवं रजोगुण सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं। 
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इस पूजन से उसी क्षण मिलता है फल 
श्वास वेद हैं एवं सूर्य-चंद्र नेत्र व वक्षस्थल तीनों लोक और चौदह भुवन हैं। विशाल जटाओं में सभी नदियों, पर्वतों और तीर्थों का वास है, जहां सृष्टि के सभी ऋषि, मुनि, योगी आदि तपस्या में लीन रहते हैं। शिवलिंग का पूजन-अभिषेक करने से सभी देवी-देवताओं के अभिषेक का फल उसी क्षण प्राप्त हो जाता है। श्री लिंग पुराण के अनुसार शिवलिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य में तीनों लोकों के ईश्वर श्री विष्णु तथा ऊपरी भाग में प्रणव संज्ञक महादेव रूद्र सदाशिव विराजमान रहते हैं। लिंग की वेदी महादेवी अम्बिका हैं। वे (सत,रज,तम) तीनों गुणों से तथा त्रिदेव से युक्त रहती हैं। जो प्राणी उस वेदी के साथ लिंग की पूजा करता है, वह शिव-पार्वती की कृपा सहजता से प्राप्त कर लेता है। 
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मनोकामना के अनुसार करें अभिषेक
शिवलिंग पर जल से अभिषेक करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि, दूध से उत्तम संतान की प्राप्ति, गन्ने के रस से यश, मनोनुकूल पति/पत्नी की प्राप्ति, शहद से कर्ज मुक्ति, कुश के जल से रोग मुक्ति, पंचामृत से अष्टलक्ष्मी व तीर्थों के जल से मोक्ष की प्राप्ति होती है।इसी प्रकार तरह-तरह के सभी शिवलिंगों की पूजा सुख-सौभाग्य एवं सिद्धि प्रदान करने वाली होती है।
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चमत्कारी है पारद शिवलिंग
भगवान शंकर को पारा अतिप्रिय है तथा रसराज पारद शिव का शक्ति रुपी विग्रह होने के कारण ही समस्त असुर तथा देवी-देवताओं के लिए वंदनीय है।पारद शिवलिंग की पूजा को शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। इस समूचे ब्रह्माण्ड में सर्वोत्तम दिव्य वस्तु के रूप में पूजित रससिद्ध पारद शिवलिंग समस्त दैहिक, दैविक एवं भौतिक महादु:खों से मुक्ति दिलाने वाला है। पारद शंभुबीज है। कहने का तात्पर्य यह कि पारद की उत्पत्ति महादेव के शरीर से उत्पन्न पदार्थ शुक्र से मानी गई है। इसलिए शास्त्रों में पारद को साक्षात शिव का रूप माना गया है और पारद लिंग का सबसे ज़्यादा महत्त्व बताकर उसे दिव्य बताया गया है। 

शिवलिंग पूजन से रावण पर प्रसन्न हुए थे महादेव 
पारद शब्द में प-विष्णु, अ-अकार, र-शिव और द-ब्रह्मा का प्रतीक है। पारद एक विशिष्ठ तरल अवस्था में धातु और स्वयं सिद्ध पदार्थ है। विशिष्ट शास्त्रोक्त व तंत्रोक्त गोपनीय विधियों से व अनेक जड़ी-बूटियों की सहायता से दिव्य पारद शिवलिंग का निर्माण किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार रावण रससिद्ध योगी था। पारद शिवलिंग की पूजा से शिव को प्रसन्न कर अनेक दिव्य शक्तियों को प्राप्त किया।वाणासुर ने भी पारद शिवलिंग की पूजा कर शिव से मनोवांछित वर प्राप्त किया। 

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100 अश्वमेध यज्ञ के बराबर मिलता है फल
शिव महापुराण में शिवजी का कथन है कि करोड़ों शिवलिंगों के पूजन से जो फल प्राप्त होता है, उससे भी करोड़ गुना अधिक फल पारद शिवलिंग की पूजा और उसके दर्शन मात्र से ही प्राप्त हो जाता है। अनेकों जघन्य अपराध पारद शिवलिंग के दर्शन मात्र से दूर हो जाते हैं। इसके स्पर्श मात्र से मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो मनुष्य पारद शिवलिंग की भक्ति पूर्वक पूजा-अभिषेक तथा दर्शन करता है, उसे तीनों लोकों में स्थित समस्त शिवलिंगों के पूजन का फल मिलता है एवं 100 अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर का फल प्राप्त होता है। यह सभी तरह के लौकिक तथा परलौकिक सुख देने वाला है। इस शिवलिंग का जहां पूजन होता है वहां साक्षात शंकर का वास होता है।


मनोकामना के अनुसार चुनें शिवलिंग
लिंग महापुराण के अनुसार रत्न निर्मित लिंग श्री (लक्ष्मी) प्रदान करने वाला, पाषाण निर्मित लिंग समस्त सिद्धियों को देने वाला, धातु निर्मित लिंग धन-संपत्ति देने वाला तथा काष्ठ निर्मित शिवलिंग भोग-सिद्धि प्रदान करने वाला है। इसी प्रकार शुद्ध मिट्टी से बना हुआ (पार्थिव) शिवलिंग सभी सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाला माना गया है। शिवलिंग का अभिषेक  करने से व्यक्ति के ग्रह-गोचर अनुकूल होने लगते हैं। घर से नकारात्मक ऊर्जा हमेशा के लिए दूर चली जाती है।
 
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