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Shardiya Navratri 4th Day: नवरात्रि के चौथे दिन होती है मां कूष्मांडा की पूजा, जानिए महत्व और पूजाविधि
Sat, 05 Oct 2024 05:35 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sat, 05 Oct 2024 05:35 PM IST
सार
मां कूष्मांडा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है। उनके आठ भुजाएं हैं, जिनमें कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जप माला धारण किए हुए हैं। मां सिंह की सवारी करती हैं।
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Shardiya Navratri Day 4
- फोटो : amar ujala
विस्तार
Shardiya Navratri 4th Day Maa Kushmanda Puja Vidhi : नवरात्रि के चौथे दिन देवी दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। अपनी मंद, हल्की हंसी द्वारा अण्ड अर्थात ब्रह्माण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था,चारों ओर अन्धकार ही अन्धकार परिव्याप्त था,तब इन्हीं देवी ने अपने 'ईषत' हास्य से ब्रह्माण्ड की रचना की थी। अतः यही सृष्टि की आदि-स्वरूपा,आदि शक्ति हैं। इनके पूर्व ब्रह्माण्ड का अस्तित्व नहीं था। इनका निवास सूर्य मंडल के भीतर के लोक में स्थित है।
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मां कूष्मांडा का स्वरूप
मां कूष्मांडा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और दिव्य है। उनके आठ भुजाएं हैं, जिनमें कमंडल, धनुष, बाण, कमल का फूल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जप माला धारण किए हुए हैं। मां सिंह की सवारी करती हैं। उनका यह स्वरूप शक्ति, समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है।
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मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व
मां कूष्मांडा की पूजा करने से भक्तों के सभी रोग, दुख और कष्ट समाप्त हो जाते हैं। इनकी पूजा से आयु, यश, बल और समृद्धि की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से, माना जाता है कि मां की कृपा से भक्तों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। देवी कूष्मांडा रोगों का नाश करने वाली और आयु में वृद्धि करने वाली मानी जाती हैं। इनके पूजन से असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है और मनुष्य की आरोग्यता बनी रहती है। मां कूष्मांडा की आराधना से जीवन में सभी प्रकार की समृद्धि और सुख-शांति का प्रवेश होता है। नवरात्रि उपासना में चौथे दिन इन्ही के विग्रह का पूजन-आराधना किया जाता है।
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मां कूष्मांडा की पूजा विधि
स्नान और शुद्धि: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और अपने पूजन स्थल को शुद्ध करें। मां कूष्मांडा की प्रतिमा या चित्र को पूजा स्थल पर स्थापित करें।
ध्यान और आवाहन: मां का ध्यान कर उन्हें आमंत्रित करें। यह ध्यान करते समय मां के दिव्य स्वरूप की कल्पना करें।
सिंहासन प्रदान करें: मां को सिंहासन पर विराजित करने के बाद जल और पंचामृत से स्नान कराएं।
श्रृंगार: मां को सुंदर वस्त्र, फूल, माला और आभूषण अर्पित करें। विशेष रूप से, कुम्हड़ा (कद्दू) का भोग मां को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
भोग: मां को मिष्ठान्न, फल, नारियल और विशेष भोग अर्पित करें। मां कूष्मांडा को सफेद चीजों का भोग लगाना शुभ होता है।
आरती: मां की आरती उतारें और उन्हें दीपक, धूप और गंध अर्पित करें।
मंत्र जाप:
या देवी सर्वभूतेषु मां कुष्मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
इसके अलावा, "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडा देवी नमः" मंत्र का जाप 108 बार करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।