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Navratri 2024: शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आज से शुरू, जानें कलश स्थापना मुहूर्त और पूजा विधि

Wed, 02 Oct 2024 03:36 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 02 Oct 2024 03:36 PM IST
सार

Shardiya Navratri 2024 Puja Vidhi, Timing, Shubh Muhurat in Hindi: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना और विधि-विधान के साथ पूजा करना बहुत ही फलदायी माना जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं।

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Shardiya Navratri 2024 Maa Durga Puja Vidhi Kalash Sthapana Timing Subh Muhurat Durga Chalisa Aarti in Hindi
शारदीय नवरात्रि 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Shardiya Navratri 2024 Kalash Sthapana Timing Subh Muhurat Puja Vidhi :  आज यानी 03 अक्तूबर, गुरुवार से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो रहे हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि के पर्व का विशेष महत्व होता है। साल भर में कुल चार नवरात्रि आती हैं, जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि का खास महत्व होता है, जबकि दो गुप्त नवरात्रि होते हैं। नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-आराधना करने का विधान होता है। नवरात्रि के पहले दिन यानी आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ विधि-विधानपूर्वक नौ दिनों तक लगातार पूजा-पाठ और मंत्रोचार के साथ मां दुर्गा की स्तुति की जाती है। इस बार शारदीय नवरात्रि पर देवी दुर्गा डोली पर सवार होकर पृथ्वी पर आ रही हैं। मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के नौ दिन तक मां दुर्गा अपने भक्तों के बीच में रहती हैं और सभी को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। आइए जानते हैं इस शारदीय नवरात्रि पर कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, मंत्र और महत्व के बारे में... 
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शारदीय नवरात्रि 2024 तिथि

नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की विशेष पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि का पर्व हर वर्ष आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नवमी तिथि मनाया जाता है। शारदीय नवरात्रि 03 अक्तूबर से शुरू होकर 11 अक्तूबर तक रहेगी। 11 अक्तूबर को नवमी और इसके अगले दिन 12 अक्तूबर को दशहरे का पर्व मनाया जाएगा। वैदिक पंचांग के अनुसार इस बार आश्विन माह की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 3 अक्तूबर को अर्धरात्रि 12 बजकर 19 मिनट से होगी, जिसका समापन 4 अक्तूबर को रात 2 बजकर 58 मिनट होगा।   
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नवरात्रि कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

इस साल शारदीय नवरात्रि पर कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन शुभ मुहूर्त में घट स्थापना और विधि-विधान के साथ पूजा करना बहुत ही फलदायी माना जाता है। 
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पहला शुभ मुहूर्त- गुरुवार, 3 अक्तूबर को सुबह 6 बजकर 15 मिनट से लेकर सुबह 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा।
दूसरा शुभ मुहूर्त-  गुरुवार, 3 अक्तूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट लेकर 12 बजकर 33 मिनट तक।

चौघड़िया मुहूर्त में कलश स्थापना

शुभ- सुबह 6.16 से 7.47 तक
लाभ- दोपहर 12.20 से 1. 51 तक
अमृत-दोपहर 1.51 से 3.21 तक
शुभ- शाम 4.52 से 6.23 तक

कलश स्थापना पूजा मंत्र- ओम आ जिघ्र कलशं मह्राा त्वा विशन्तिवन्जव:। पुररूर्जा नि वर्तस्व सा न: सहस्रं धुक्ष्वोरुधारा पयस्वती पुरर्मा विशतादयि: 

कलश स्थापना महत्व और पूजा विधि

कलश स्थापना को शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है।शास्त्रों के अनुसार कलश में जल को ब्रह्मांड की सभी सकारात्मक ऊर्जाओं का स्रोत माना गया है। इसे देवी दुर्गा की शक्ति और सृजन की प्रतीकात्मक उपस्थिति माना जाता है। कलश स्थापना के साथ ही देवी के नौ रूपों का आवाहन किया जाता है, और यह नौ दिन तक चली पूजा का मुख्य केंद्र होता है। यह विधि नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करने और घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने का साधन माना जाता है। कलश स्थापना के साथ देवी दुर्गा की पूजा आरंभ होती है और यह पूजा साधक के मन और घर को पवित्र करने का माध्यम होती है।  

3 अक्तूबर 2024 को प्रतिपदा तिथि पर सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान-ध्यान कर लें और मन में माता का ध्यान करते हुए विधिवत पूजा आरंभ करें। कलश स्थापना के लिए सामग्री तैयार कर लें। कलश स्थापना के लिए एक मिट्टी के पात्र में या किसी शुद्ध थाली में मिट्टी और उसमें जौ के बीज डाल लें। इसके उपरांत मिट्टी के कलश या तांबे के लोटे पर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं और ऊपरी भाग में मौली बांध लें। इसके बाद लोटे में जल भर लें और उसमें थोड़ा गंगाजल जरूर मिला लें। फिर कलश में दूब, अक्षत, सुपारी और सवा रुपया रख दें। इसमें आम या अशोक की छोटी टहनी कलश में रख दें। इसके बाद एक पानी वाला नारियल लें और उस पर लाल वस्त्र लपेटकर मौली बांध दें। फिर इस नारियल को कलश के बीच में रखें और पात्र के मध्य में कलश स्थापित कर दें। अंत में दुर्गा चालीसा का पाठ करें और आरती करें।

मां दुर्गा के मंत्र और आरती

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।

ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।।

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।।

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि। 
गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोह्यस्तु ते।।

मां दुर्गा की आरती

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
जय अम्बे गौरी
माँग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
जय अम्बे गौरी

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
जय अम्बे गौरी
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
जय अम्बे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर, सम राजत ज्योति॥
जय अम्बे गौरी
शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
जय अम्बे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
जय अम्बे गौरी
ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
जय अम्बे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूँ।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
जय अम्बे गौरी
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
जय अम्बे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
जय अम्बे गौरी
कन्चन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
जय अम्बे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
जय अम्बे गौरी


 
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