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Shardiya Navratri 2024: नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा को समर्पित, जानें किस दिन किस स्वरूप की होगी पूजा

Tue, 24 Sep 2024 02:21 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Tue, 24 Sep 2024 02:21 PM IST
सार

Shardiya Navratri 2024: पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है, जिसका समापन नवमी तिथि होता है। 

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Shardiya Navratri 2024 maa durga 9 roop name know nine forms of goddess durga in hindi
Shardiya Navratri 2024 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Shardiya Navratri 2024: पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होती है, जिसका समापन नवमी तिथि को होता है। इस बार 3 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रही है, जो 11 अक्तूबर 2024 को महानवमी पर समाप्त होगी। इससे अगले दिन यानी 12 अक्तूबर शनिवार को दुर्गा विसर्जन और दशहरा मनाया जाएगा। इस माह में शरद ऋतु की शुरुआत होती है, इसलिए इसे शारदीय नवरात्रि के नाम से जाना जाता है। इस अवधि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, और घर, मंदिर व पंडालों में मां देवी का भव्य स्वागत किया जाता है। 

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शारदीय नवरात्रि में जगह-जगह गरबा, मेला व रामलीला जैसे धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस बार नवरात्रि की शुरुआत गुरूवार से होने के कारण माता का आगमन पालकी में माना जा रहा है। माता के आगमन से जीवन में खुशियां और धन दौलत में वृद्धि होती हैं। ऐसे में दिन के अनुसार देवी की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही समस्त संकटों का निवारण होता है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि में किस दिन मां दुर्गा के किस रूप की पूजा की जाती है।

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मां दुर्गा के नौ स्वरूप 

शैलपुत्री     
नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। देवी शैलपुत्री की पूजा करने से हर मनोकमानएं पूरी होती हैं। देवी को सफेद वस्तुएं प्रिय हैं। ऐसे में शारदीय नवरात्रि में उन्हें सफेद मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए। इससे सुख-समृद्धि का वास होता है।

ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है। उनकी आराधना में हमेशा 'या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।' मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे भाग्य में वृद्धि होती हैं। साथ ही लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।

चंद्रघंटा
मां दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा हैं, और नवरात्रि के तीसरे दिन इन्हीं के विग्रह की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन देवी की विधिनुसार पूजा अर्चना करने से व्यक्ति बुरी बलाओं से बचा रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां चंद्रघंटा के आशीर्वाद से समस्त पाप और बाधाएं नष्ट हो जाती हैं।

कुष्मांडा
चौथे दिन देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने से जातक के सभी कष्ट दूर और कामनाएं पूरी होती हैं।

स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। देवी की आराधना से जातक को सुख और सौभाग्य का वरदान मिलता है। इस दौरान पूजा में 'सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥' मंत्र का जाप करना चाहिए।

कात्यायनी
छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी की विधि अनुसार पूजा अर्चना करने से विवाह संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।

कालरात्रि
सातवें दिन मां दुर्गा की सातवीं शक्ति माता कालरात्रि की पूजा का विधान है। इस दिन माता कालरात्रि की पूजा और सच्चे मन से उपवास रखने से सभी बुरी शक्तियां दूर होती है। 

महागौरी
नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी की आराधना का विधान है। इस दिन देवी की पूजा करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती हैं। मान्यताओं के अनुसार देवी महागौरी को मोगरे के फूल अति प्रिय हैं। पूजा में इस फूल को शामिल करने से  असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। 

सिद्धिदात्री
नवें दिन मां दुर्गाजी की नवीं शक्ति सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री की अर्चना करने से जातक के सभी कार्य बिना किसी बाधा के पूरे होते हैं। साथ ही साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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