Shardiya Navratri 2024: नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के इन 7 श्लोकों का करें पाठ, नौकरी में मिलेगा लाभ
Shardiya Navratri 2024 Durga Saptashati Path: 3 अक्तूबर 2024, गुरुवार से शारदीय नवरात्रि के पर्व की शुरुआत हो चुकी है, जिसका समापन 11 अक्तूबर 2024 को होगा। अगले दिन 12 अक्तूबर को दुर्गा विसर्जन और दशहरा मनाया जाएगा।
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Shardiya Navratri 2024 Durga Saptashati Path: 3 अक्तूबर 2024, गुरुवार से शारदीय नवरात्रि के पर्व की शुरुआत हो चुकी है, जिसका समापन 11 अक्तूबर 2024 को होगा। अगले दिन 12 अक्तूबर को दुर्गा विसर्जन और दशहरा मनाया जाएगा। इस बार माता रानी का आगमन डोली पर हुआ है। मुहूर्त के अनुसार मां दुर्गा की मूर्ति को घरों व पंडालों में विराजित कर दिया गया है। नवरात्रि का ये समय हम सभी के लिए बेहद शुभ है, क्योंकि माता के आगमन से साधक की सभी समस्याएं दूर होती हैं। कहते हैं कि नवरात्रि में मां दुर्गा घरों में भ्रमण करती हैं, इसलिए कलश स्थापना जरूर करनी चाहिए।
मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों तक मां के नौ अलग-अलग स्वरूपों की आराधना करने से वह प्रसन्न होती हैं। इससे साधक के भाग्य में वृद्धि के योग बनते हैं। इस दौरान मां दुर्गा की पूजा में दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करना चाहिए, इससे हर मनोकामनाएं पूरी होती हैं। साथ ही धन दौलत, करियर और नौकरी समेत सभी क्षेत्रों में लाभ की प्राप्ति के योग बनते हैं। ऐसे में आइए इस शक्तिशाली पाठ के बारे में जानते हैं।
दुर्गा सप्तशती पाठ
नवरात्रि के दौरान हमेशा पूजा में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए। इस पाठ से जातक की सभी समस्याएं दूर होती हैं। इस पाठ में 13 अध्याय है, जिसमें 700 श्लोक हैं। माना जाता है कि दुर्गा सप्तशती पाठ के इन 13 अध्यायों में मां दुर्गा के तीन चरित्रों के बारे में बताया गया है। अगर आप इसका संपूर्ण पाठ नहीं कर पाते हैं, तो इन 7 श्लोकों का पाठ कर सकते हैं-
ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हि सा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।।
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेष जन्तोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्र्य दुःख भयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकार करणाय सदार्द्रचित्ता।।
सर्वमङ्गल माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंम्बके गौरि नारायणि नमोस्तु ते॥
शरणागत दीनार्तपरित्राण परायणे
सर्वस्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोस्तु ते॥4॥
सर्वस्वरुपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोस्तु ते॥
रोगानशेषानपंहसि तुष्टारुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता हि आश्रयतां प्रयान्ति॥
सर्वबाधा प्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यम् अस्मद् वैरि विनाशनम्॥
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।