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Navratri 2020: मां कात्यायनी की कथा, ऐसे पड़ा मां का यह नाम, महिषासुर का किया था संहार

Wed, 21 Oct 2020 01:18 PM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Wed, 21 Oct 2020 01:18 PM IST
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Shardiya Navratri 2020 sixth day of Navratri 2020 maa katyayani story
शारदीय नवरात्रि 2020: मां कात्यायनी को समर्पित है नवरात्रि का छठा दिन - फोटो : navratri 2020

Shardiya Navratri 2020: यह शारदीय नवरात्रि का पावन त्योहार चल रहा है। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक यह त्योहार मनाया जाता है। इस पर्व में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी की कथा।

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मां कात्यायनी की कथा
मन की शक्ति की देवी माता कात्यायनी की उपासना से मनुष्य सभी इन्द्रियों को वश में कर सकता हैं। दुर्गा मां के इस रूप में प्रकट होने की बड़ी अद्भुत कथा है। यह देवी का वही स्वरूप है, जिन्होंने महिषासुर का वध किया था इसलिए यह दानवों, असुरों और पापी जीवधारियों का नाश करने वाली देवी कहलाती हैं।

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Shardiya Navratri 2020 sixth day of Navratri 2020 maa katyayani story
कात्यायनी देवी - फोटो : SELF
ऐसा है मां का यह स्वरूप

पुराणों के अनुसार कात्यायनी देवी की पूजा गृहस्थ और विवाह के इच्छुक व्यक्तियों के साथ-साथ शिक्षा प्राप्ति के क्षेत्र में प्रयासरत भक्तों के लिए भी बहुत ही लाभदायक हैं, क्योंकि मां कात्यायनी अमोद्य फलदायिनी है। मां कात्यायनी देवी का शरीर सोने की भांति चमकीला है। चार भुजा वाली मां कात्यायनी शेर पर सवार है, जिनके एक हाथ में तलवार और दूसरे हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। साथ ही दूसरें दोनों हाथों में वरमुद्रा और अभयमुद्रा है।

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जब महिषासुर का किया संहार
मां कत्यायनी का वाहन सिंह है। कहा जाता है कि कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे, उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे और जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बढ़ गया तब भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश तीनों ने मिलकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को उत्पन्न किया। ऋषि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण इन्हें कात्यायनी के नाम से जाना जाता है।

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