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नवरात्रि 2018: घर पर इस तरह से करनी चाहिए कलश स्थापना, तभी सफल होगी पूजा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Updated Sat, 06 Oct 2018 03:07 PM IST
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shardiya navratri 2018 kalash sthapana
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10 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि प्रारम्भ हो रहे हैं। नवरात्रि के 9 दिनों तक भक्त मां शक्ति की उपासना करते हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में मां के अलग–अलग रुपों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री मां की शक्ति पूजा की जाती है। घटस्थापना नवरात्रि के पहले दिन होती है। नवरात्रि पर कलश स्थापना करते वक्त और 9 दिनों तक कुछ विशेष सावधानियां रखती जाती है तभी पूजा का संपूर्ण फल मिलता है।
- ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व की दिशा को देवी-देवताओं की दिशा मानी जाती है। इसलिए कलश स्थापना और माता की प्रतिमा इसी दिशा में होनी चाहिए।
- कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए और माता की पूजा से पहले भगवान गणेश का पूजन करना चाहिए।
- नवरात्रि में एक जटाधारी नारियल को लाल कपड़े में बांधकर कलश में रखने से पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नारियल का मुंह आपकी तरफ होना चाहिए।
- पूजा से पहले कलश पर स्वस्तिक बनाएं और मौली बांधें। फिर आम के पत्तों के साथ घट या कलश में हल्दी की गांठ, साबुत सुपारी, दुर्वा और पैसे रखें।
- 9 दिनों तक देवी पूजन में माता को फल, मिठाई और रात में दूध का भोग लगाएं। पूजा के समय दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें और अखंड दीया जलाएं जो व्रत के पारण तक जलता रहे।
- नवरात्रि के पूरे होने पर आखिरी दिन माता को हलवा-पूरी का भोग जरूर लगाएं।
घट( कलश) स्थापना का शुभ मुहूर्त
सुबह - 06 बजकर 18 मिनट से 10 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त से सुबह 7.56 मिनट तक
कुल अवधि- 3 घंटे 52 मिनट
महाअष्टमी- 17 अक्टूबर
महानवमी- 18 अक्टूबर
विजयादशमी (दशहरा) -19 अक्टूबर 2018
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- ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व की दिशा को देवी-देवताओं की दिशा मानी जाती है। इसलिए कलश स्थापना और माता की प्रतिमा इसी दिशा में होनी चाहिए।
- कलश स्थापना हमेशा शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए और माता की पूजा से पहले भगवान गणेश का पूजन करना चाहिए।
- नवरात्रि में एक जटाधारी नारियल को लाल कपड़े में बांधकर कलश में रखने से पहले इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि नारियल का मुंह आपकी तरफ होना चाहिए।
- पूजा से पहले कलश पर स्वस्तिक बनाएं और मौली बांधें। फिर आम के पत्तों के साथ घट या कलश में हल्दी की गांठ, साबुत सुपारी, दुर्वा और पैसे रखें।
- 9 दिनों तक देवी पूजन में माता को फल, मिठाई और रात में दूध का भोग लगाएं। पूजा के समय दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ जरूर करें और अखंड दीया जलाएं जो व्रत के पारण तक जलता रहे।
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- नवरात्रि के पूरे होने पर आखिरी दिन माता को हलवा-पूरी का भोग जरूर लगाएं।
घट( कलश) स्थापना का शुभ मुहूर्त
सुबह - 06 बजकर 18 मिनट से 10 बजकर 11 मिनट तक रहेगा।
कलश स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त से सुबह 7.56 मिनट तक
कुल अवधि- 3 घंटे 52 मिनट
महाअष्टमी- 17 अक्टूबर
महानवमी- 18 अक्टूबर
विजयादशमी (दशहरा) -19 अक्टूबर 2018