17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि आरंभ, जानिए कलश स्थापना, पूजा विधि और मंत्र के बारे में सबकुछ
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शक्ति आराधना का सरल उपाय हैं ध्यान दें शास्त्र कहते हैं कि, भवानी शंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वास रुपिणौ। याभ्यां बिना न पश्यन्ति सिद्धः स्वान्तःथमीस्वरम। अर्थात माता शक्ति अथवा किसी भी देवी-देवता की आराधना के श्रद्धा-विश्वास और समर्पण का होना अति आवश्यक है। आपको विश्वास है, किन्तु श्रद्धा नहीं है, तो उस पूजा का कोई लाभ नहीं होगा। श्रद्धा है किन्तु विश्वास नहीं है तो भी उस पूजा का कोई लाभ नहीं होगा। अगर ये दोनों हैं और समर्पण भी है तो आप को परमानंद की प्राप्ति होगी।
नवरात्रि के प्रथम दिन सुबह स्नान-ध्यान करके माता दुर्गा, भगवान गणेश नवग्रह कुबेरादि की मूर्ति के साथ साथ कलश स्थापन करें। कलश सोना, चांदी, तामा, पीतल या मिट्टी का होना चाहिए। लोहे अथवा स्टील का कलश पूजा में प्रयोग न करें। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक आदि लिख दें। आपको कोई मंत्र आता हो या नहीं भी आता हो इस विषय को लेकर चिंता न करें।
कलश स्थापन के समय अपने पूजा गृह में पूर्व के कोण की तरफ अथवा घर के आंगन से पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज रखें, संभव हो तो नदी की रेत रखें। फिर जौ भी डाले इसके उपरांत कलश में जल गंगाजल, लौंग, इलायची, सुपारी, रोली, मोली, चन्दन, अक्षत, हल्दी, रुपया पुष्पादि डालें पुनः ॐ भूम्यै नमः कहते हुए कलश को सात अनाजों सहित रेत के ऊपर स्थापित करें। अब कलश में थोडा और जल-गंगाजल डालते हुए ॐ वरुणाय नमः कहते हुए पूर्ण रूप से भर दें ऊपर से पंचपल्लव आम, पाकड़, गूलर, पीपल और वरगद में से कोई भी पल्लव रखें ऊपर से जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे मे भरकर कलश के ऊपर रखें और अब उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखें साथ ही नवग्रह भी बनायें। अपने हाथ में हल्दी अक्षत पुष्प लेकर मन में ही संकल्प लें कि, माँ मैं आज नवरात्रि की प्रतिपदा से आप की आराधना अमुक कार्य के लिए कर रहा-रही हूँ मेरी पूजा स्वीकार करो और मेरे ईष्टकार्य को सिद्ध करो।
अपने पूजा स्थल से दक्षिण और पूर्व की तरफ घी का दीपक जलाते हुए, ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दनः। दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तु ते यह मंत्र पढ़ें। माँ की आराधना के समय यदि आपको कोई भी मन्त्र नहीं आता हो तो आप केवल दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र- ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे। से भी पूजा कर सकते हैं यही मंत्र पढ़ते हुए सामग्री चढ़ाएं। माता शक्ति का यह मंत्र अमोघ है। जो भी यथा संभव सामग्री हो आप उसकी चिंता न करें कुछ भी सुलभ न हो तो केवल हल्दी अक्षत और पुष्प से ही माता की आराधना करें। संभव हो श्रृंगार का सामान और नारियल-चुन्नी जरूर चढ़ाएं। एक ही बात का ध्यान रखें माँ शक्ति ही परब्रह्म हैं। उन्हें आप के भाव और भक्ति चाहिए सामग्री नहीं। इसलिए जो भी सामग्री आपके पास उपलब्ध हो वही बिलकुल भक्तिभाव और समर्पण के साथ माँ को अर्पित करें।
धन और सामग्री के अभाव में अपने मन में दुख अथवा ग्लानि को स्थान न दें। आप एक ही मंत्र से पूजा और आरती तक कर सकते हैं। विद्यार्थी वर्ग और जिन लोंगो की जन्मकुंडली में गोचर में अशुभ ग्रहों की दशा, अन्तर्दशा अथवा प्रत्यंतर दशा चल रही हो वै सभी ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः। मंत्र पढ़ते हुए जप करें। जिन प्राणियों के घर में अशांति हो उन्हें- या देवि ! सर्व भूतेषु शान्ति रूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। इस मंत्र का जप घर-परिवार की अशांति दूर करेगा।
जिन लोंगों पर काफी क़र्ज हो चुका है नख-सिख क़र्ज़ में डूबे हैं, उनके लिए यह नवरात्रि पर्व लक्ष्मी प्राप्ति और क़र्ज़ से मुक्ति के प्रयास का सही समय है। शक्ति साधना के इस अवसर पर या देवि ! सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता ! नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः। इस मंत्र का जप करें और इसी मंत्र से माँ की पूजा भी करें। इन सबके अतिरिक्त अगर संभव हो तो सिद्धकुंजिका स्तोत्र और देव्य अथर्वशीर्ष का पाठ करें। जिनको पूर्ण विधि-विधान आता है वे भक्त अपने ही अनुसार माँ की भक्ति करें।