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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Sharad Purnima 2024 Date 16 October Know About Significance of Sharad Purnima And Put Kheer At Night

Sharad Purnima 2024: 16 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा, इस दिन खुले आसमान के नीचे क्यों रखते हैं खीर ?

Mon, 14 Oct 2024 11:47 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Mon, 14 Oct 2024 11:47 AM IST
सार

शरद पूर्णिमा को भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के रासलीला से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारासलीला की थी, जिसे 'रास पूर्णिमा' भी कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृतमयी मानी जाती हैं।

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Sharad Purnima 2024 Date 16 October Know About Significance of Sharad Purnima And Put Kheer At Night
शरद पूर्णिमा का महत्व - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Sharad Purnima 2024: शरद पूर्णिमा सनातन धर्म में विशेष महत्व रखती है, जिसे 'कोजागरी पूर्णिमा' या 'रास पूर्णिमा' के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार विशेष रूप से लक्ष्मी पूजन, व्रत और रात के समय चंद्रमा की उपासना से जुड़ा होता है। नारद पुराण के अनुसार प्रतिवर्ष किया जाने वाला यह व्रत लक्ष्मीजी को संतुष्ट करने वाला है, इससे प्रसन्न हुई लक्ष्मी इस लोक में सुख-समृद्धि प्रदान करती है। इस दिन खीर को खुले आसमान के नीचे रखने की परंपरा का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व दोनों ही गहरा है। पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 16 अक्टूबर को रात्रि 08 बजकर 40 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 17 अक्टूबर को शाम को 04 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसे में शरद पूर्णिमा का पर्व 16 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन चंद्रोदय शाम को 05 बजकर 05 मिनट पर होगा। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

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धार्मिक महत्व
शरद पूर्णिमा को भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों के रासलीला से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारासलीला की थी, जिसे 'रास पूर्णिमा' भी कहा जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होता है और उसकी किरणें अमृतमयी मानी जाती हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को जागकर मां लक्ष्मी का स्वागत करना समृद्धि का प्रतीक है। खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा का धार्मिक महत्व यह है कि चंद्रमा की किरणों से खीर में अमृत का संचार होता है, जिससे वह अधिक पौष्टिक और दिव्य भोजन बन जाता है। इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से स्वास्थ्य और समृद्धि में वृद्धि होती है। साथ ही, यह भी माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात में मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जो लोग जागरण करते हैं और खीर का भोग लगाते हैं, उन्हें मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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वैज्ञानिक महत्व
शरद पूर्णिमा का समय वर्ष का वह चरण होता है जब मौसम बदल रहा होता है। गर्मियों के बाद यह पहली पूर्णिमा होती है और वातावरण में ठंडक का आगमन होने लगता है। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी के सबसे नजदीक होता है, जिससे उसकी किरणें अत्यधिक प्रभावी होती हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से चंद्रमा की किरणें वातावरण में उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा को कम करती हैं और खीर जैसे भोजन पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव डालती हैं। चंद्रमा की किरणों का सकारात्मक प्रभाव खीर के माध्यम से शरीर और मन दोनों पर पड़ता है, जो इसे एक विशेष और पवित्र अनुष्ठान बनाता है। आयुर्वेद के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा की किरणों में बैठकर खीर खाने से शारीरिक और मानसिक संतुलन बना रहता है और यह पाचन तंत्र को भी सुधारता है।

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