Sawan 2024: शनि की साढ़ेसाती से बचाव के लिए सावन में करें इन चीजों का दान
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Sawan 2024: हिंदू धर्म में सभी ऋतुएं अपना अलग महत्व रखती हैं। इनमें वर्षा ऋतु को सबसे खास माना गया है। वर्तमान में इसकी शुरुआत हो चुकी है और देशभर में मानसून जारी है। बता दें वर्षा ऋतु के दौरान सावन माह भी पड़ता है, जो पूजा पाठ और धार्मिक अनुष्ठान के लिए बेहद शुभ होता है। इस दौरान महादेव की पूजा करने से मनचाहे परिणामों की प्राप्ति होती है। इससे सुख-समृद्धि के योग बनते हैं। वहीं इस साल 22 जुलाई 2024 से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस माह में मां पार्वती और शिव जी की एक साथ पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है। हालांकि इस माह में शनिदेव की पूजा करना भी लाभदायक होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में शनि देव की पूजा करनी चाहिए, इससे वह प्रसन्न होते हैं। इस दौरान कुछ खास उपाय करने से न्याय के देवता शनिदेव की कृपा बनी रहती है। वहीं दान करना भी बेहद शुभ होता है। माना जाता है कि दान करने से व्यक्ति के भाग्य में वृद्धि होती है। इसके अलावा शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव भी कम होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि सावन माह में किन चीजों का दान करना चाहिए।
सावन में किन चीजों का करें दान
- बरसात के दौरान सावन माह भी आता है। माना जाता है कि सावन माह में सबसे अधिक बारिश होती है। ऐसे में शनि देव को प्रसन्न करने के लिए काले रंग की चीजों का दान करना चाहिए। इससे वह प्रसन्न हो सकते हैं।
- इस दौरान आप काले रंग के जूते-चप्पलों का दान भी कर सकते हैं। इससे जीवन में सुख-समृद्धि के योग बनते हैं।
- बरसात के मौसम में छाते का उपयोग सबसे अधिक होता है। ऐसे में आप जरूरतमंद लोगों को काले रंग के छाते का दान कर सकते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से शनि महाराज की कृपा बनी रहती है।
- मानसून का समय पक्षियों के लिए बेहद कष्टकारी होता है। मौसम खराब और भारी बारिश के कारण उन्हें रहने में समस्या आती है। ऐसे में आप उनका ध्यान रखने के साथ-साथ उन्हें सतनाजा खिलाएं।
- सावन माह में अधिक बारिश के कारण कुत्तों को अधिक समस्याएं होती हैं। बारिश होने की वजह से उनके लिए रहने का ठिकाना बनाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आप उनके लिए रहने का व्यवस्था कर सकते हैं। इस दौरान उन्हें खाना भी खिलाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से शनिदेव खुश होते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।