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Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Raksha Bandhan 2022 Know the religious importance of Rakshbandhan in Hindi

Raksha Bandhan 2022: श्रावणी पूर्णिमा के दिन मनाया जाएगा रक्षाबंधन, जानें इसका आध्यात्मिक दृष्टि से महत्व

Wed, 10 Aug 2022 06:15 PM IST
श्वेता सिंह कु. कृतिका खत्री,सनातन संस्था, दिल्ली
कु. कृतिका खत्री,सनातन संस्था, दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 10 Aug 2022 06:15 PM IST
सार

रक्षाबंधन का यह पावन पर्व 11 और 12 अगस्त को मनाया जा रहा है। श्रावण पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला रक्षाबंधन का यह त्योहार इस बार भद्रा का साया लेकर आया है। इस वजह से कुछ लोग राखी का त्योहार 12 अगस्त को मना रहे हैं।

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Raksha Bandhan 2022 Know the religious importance of Rakshbandhan in Hindi
रक्षाबंधन का इतिहास और इसका आध्यात्मिक महत्व - फोटो : iStock

विस्तार

Raksha Bandhan 2022:  श्रावण पूर्णिमा में आने वाले रक्षाबंधन त्यौहार के दिन बहन अपने भाई की आरती उतार कर उसको प्रेम स्वरूप राखी बांधती है। भाई अपनी बहन को भेंट स्वरूप आशीर्वाद देता है। सहस्रों वर्षों से चले आ रहे इस रक्षाबंधन के त्योहार के पीछे का इतिहास, शास्त्र, रक्षाबंधन मनाने की पद्धति और इस त्यौहार का महत्व बताया गया है। रक्षाबंधन का यह पावन पर्व 11 और 12 अगस्त को मनाया जा रहा है। श्रावण पूर्णिमा के दिन पड़ने वाला रक्षाबंधन का यह त्योहार इस बार भद्रा का साया लेकर आया है। इस वजह से कुछ लोग राखी का त्योहार 12 अगस्त को मना रहे हैं। आइए जानते हैं रक्षाबंधन का इतिहास  और इसका आध्यात्मिक महत्व। 

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Raksha Bandhan 2022 Know the religious importance of Rakshbandhan in Hindi
रक्षाबंधन का इतिहास और इसका आध्यात्मिक महत्व - फोटो : iStock

रक्षाबंधन का इतिहास 
पाताल में रहने वाले राजा बलि के हाथ में लक्ष्मी जी ने राखी बांध कर उनको अपना भाई बनाया और नारायण जी को मुक्त किया। वह दिन सावन पूर्णिमा का था। 12 साल इंद्र और दानवों के बीच युद्ध चला। हमारे 12 वर्ष उनके 12 दिन होते हैं। इंद्र थक गए थे और दैत्य शक्तिशाली हो रहे थे। इंद्र उस युद्ध से खुद के प्राण बचाकर भाग जाने की तैयारी में थे। इंद्र की इस व्यथा को सुनकर इंद्राणी गुरु बृहस्पति के शरण में गई। गुरु बृहस्पति ने ध्यान लगाकर इंद्राणी को बताया कि यदि आप पतिव्रत बल का प्रयोग करके संकल्प लें कि मेरे पति सुरक्षित रहें और इंद्र के दाहिने कलाई पर एक धागा बांध दें, तो इंद्र युद्ध जीत जाएंगे।" इंद्राणी ने ऐसा ही किया। इन्द्र विजयी हुए और इंद्राणी का संकल्प साकार हुआ। भविष्य पुराण में बताए अनुसार रक्षाबंधन मूलतः राजाओं के लिए था। राखी की एक नई रीति इतिहास काल से आरंभ हुई ।

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रक्षाबंधन का इतिहास और इसका आध्यात्मिक महत्व - फोटो : iStock

भावनात्मक महत्व
रक्षाबंधन पर बहन भाई के हाथ में बांधती है। रक्षा सूत्र बांधने के पीछे का उद्देश्य होता है कि भाई की उन्नति हो और भाई बहन का रक्षण करें। आज के परिपेक्ष्य में बहन द्वारा भाई को राखी बांधने से अधिक महत्वपूर्ण यह हो गया है कि युवा, युवती से राखी बंधवा लेता उस कारण युवाओं का युवती के प्रति और स्त्रियों की ओर देखने का दृष्टिकोण बदल जाता है।

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रक्षाबंधन का इतिहास और इसका आध्यात्मिक महत्व - फोटो : iStock

इस विधि से बांधें राखी 
वैदिक मान्यताओं के अनुसार चावल, सोना और सफेद राई पोटली में एक साथ बांधने पर राखी बनती है, वह रेशमी धागे से बांधी जाती है। राखी बांधते समय निम्न मंत्र का जाप करना चाहिए। 
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ।।

अर्थ : महाबली और दानवीर ऐसे बलि राजा जिस रक्षासूत्र से बांधे गए उस रक्षा सूत्र से मैं आपको भी बांधती हूँ, हे राखी आप रक्षा करें।

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रक्षाबंधन का इतिहास और इसका आध्यात्मिक महत्व - फोटो : iStock

चावल के कणों के समूह को राखी कहकर रेशमी धागे से बांधने की पद्धति क्यों है ? 
'चावल यह सर्वसमावेशक का प्रतीक है अर्थात वह अपने में सबको समा लेता है उसी प्रकार वह सभी तरंगों का उत्तम आदान-प्रदान करने वाला होता है। चावल को सफेद कपड़े में बांधकर रेशमी धागे से शिव रूपी जीव के सीधे हाथ में बांधने से एक प्रकार से सात्विक रेशमी बंधन सिद्ध करना होता है। रेशमी धागा सात्विक तरंगों का उत्तम वाहक है।

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रक्षाबंधन का इतिहास और इसका आध्यात्मिक महत्व - फोटो : अमर उजाला

बहन भाई का आपस का लेन-देन हिसाब खत्म होने में सहायता होना  
बहन और भाई का एक दूसरे से सामान्यतः 30% लेन-देन का हिसाब रहता है। लेन-देन का हिसाब राखी पूर्णिमा जैसे त्यौहार के माध्यम से कम होता है, अर्थात स्थूल (व्यवहारिक ) रूप से तो एक दूसरे के बंधन में बंधते हैं; परंतु सूक्ष्म (आध्यात्मिक ) रूप से एक दूसरे का आपस का लेन-देन का हिसाब खत्म कर रहे होते हैं । प्रत्येक वर्ष बहन और भाई का इसी भाव से लेन-देन का हिसाब कम हो इस प्रतीक के रूप में राखी बांधी जाती है। बहन और भाई को आपस के लेन-देन का हिसाब कम करने की संधि होने के कारण दोनों को इसका लाभ लेना चाहिए ।

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रक्षाबंधन का इतिहास और इसका आध्यात्मिक महत्व - फोटो : Needpix.com

बहन ने भाई को राखी बांधते समय कैसा भाव रखना चाहिए 
श्रीकृष्ण की अंगुली से बहते हुए रक्त को रोकने के लिए द्रोपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाडकर उनकी उंगली में बांधा । बहन, भाई को होने वाले कष्ट को कदापि सहन नहीं कर सकती । उस पर आए संकट को दूर करने के लिए वह कुछ भी कर सकती है, राखी पूर्णिमा के दिन प्रत्येक बहन ने भाई को राखी बांधते समय यही भाव रखना चाहिए ।

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रक्षाबंधन का इतिहास और इसका आध्यात्मिक महत्व - फोटो : iStock

रक्षाबंधन के दिन बहन द्वारा बिना अपेक्षा के राखी बांधने का महत्व 
रक्षाबंधन के दिन बहन ने भाई से वस्तु रूप में किसी भी चीज की अपेक्षा मन में रखने से उस दिन मिलने वालें आध्यात्मिक लाभ से वंचित रहती है। यह दिन आध्यात्मिक दृष्टि से लेन-देन का हिसाब कम करने के लिए होता है। अपेक्षा रखकर वस्तु प्राप्त करने से लेन-देन का हिसाब 3 गुना और बढ़ जाता है।

भाई द्वारा सात्विक भेट देने का महत्व  
असात्विक भेंट रज और तम प्रधान होती है, इसलिए भाई ने बहन को सात्विक भेंटवस्तु देनी चाहिए । सात्विक भेंटवस्तु में किसी भी प्रकार का धार्मिक ग्रंथ, माला या ऐसी कोई वस्तु जो बहन की साधना करने में सहायक हो ।

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रक्षाबंधन का इतिहास और इसका आध्यात्मिक महत्व - फोटो : iStock

प्रार्थना करना 
बहन ने भाई के कल्याण के लिए और भाई ने बहन के रक्षा के लिए प्रार्थना करने के साथ ही साथ दोनों ने राष्ट्र और धर्म की रक्षा के लिए भी हमसे प्रयत्न होने दें इस प्रकार से ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए।
 

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रक्षाबंधन का इतिहास और इसका आध्यात्मिक महत्व - फोटो : Istock

राखी के माध्यम से होने वाले देवताओं का अनादर रोकना 
आजकल राखी पर ॐ, स्वस्तिक या देवताओं के चित्र होते हैं। राखी का प्रयोग करने के पश्चात वह इधर-उधर गिरी होने के कारण एक प्रकार से देवता और धर्म के प्रति उनका अनादर ही होता है, इस कारण पाप लगता है, यह रोकने के लिए राखी को पानी में विसर्जित करें।

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