Pitru Paksha 2024: पितृपक्ष के 16 दिन है पूर्वजों को समर्पित, भूलकर भी न करें ये पांच काम
Pitru Paksha 2024: प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत होती है, जिसका समापन आश्विन माह की अमावस्या को होता है।
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Pitru Paksha 2024: प्रत्येक वर्ष भाद्रपद शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृपक्ष की शुरुआत होती है, जिसका समापन आश्विन माह की अमावस्या को होता है। ये सोलह दिन पूर्वजों के मान-सम्मान को समर्पित होते हैं। इस अवधी में पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किया जाता है, जिससे पितरों की कृपा वंशों पर बनी रहती हैं।
इस वर्ष 18 सितंबर 2024 से पितृ पक्ष की शुरुआत हो चुकी है, जो 2 अक्तूबर 2024 को समाप्त होंगे। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध के दिनों में हम सभी के पितर धरती पर आते हैं। ऐसे में उनके नाम का श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्माओं को मुक्ति मिलती हैं। साथ ही वह प्रसन्न होते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितरों के प्रसन्न होने से सभी देवी-देवताओं की कृपा भी परिवार पर बनी रहती है। लेकिन श्राद्ध का समय आम दिनों के मुकाबले थोड़ा कठिन होता है। इस दौरान भोजन ग्रहण से लेकर रहन सहन के तरीकों में बदलाव आता है। साथ ही कुछ कार्यों को करने की विशेष मनाही होती हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
भूलकर भी न करें ये पांच काम
- पितृपक्ष के सोलह दिनों में किसी भी नए वस्त्र की खरीदारी नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा कपड़े और वाहन को भी नहीं खरीदना चाहिए। ऐसा करने से अशुभ परिणामों की प्राप्ति हो सकती हैं।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध के दिनों में लौकी और खीरा नहीं खाना चाहिए। साथ ही चना, सरसों का साग, दाल, जीरा और काला नमक का सेवन भी नहीं करना चाहिए। इस दौरान प्याज लहसुन, मांस मदिरा से भी परहेज करें।
- पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष की अवधि में भूलकर भी नाखून नहीं काटने चाहिए। साथ ही बाल भी न कटवाएं। ऐसा करने से हमारे पूर्वज हमसे रुष्ट हो सकते हैं।
- श्राद्ध की अवधि में आप जब भी पितरों का श्राद्ध करते हैं, तो लोहे के बर्तन का प्रयोग न करें। आप तांबे या पीतल के बर्तन का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- पितृपक्ष के सोलह दिनों तक भूलकर भी किसी नए काम की शुरुआत या कोई शुभ मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से पितृ दोष लगता है। ये समय पूर्वजों की आत्म शांति से जुड़े कार्य करने के लिए होता है। इस अवधि में जरूरतमंद लोगों की सहायता पर अधिक जोर देना चाहिए। ऐसा करने पर पुण्य फलों की प्राप्ति होती हैं।
श्राद्ध की सभी मुख्य तिथियां
17 सितंबर मंगलवार पूर्णिमा का श्राद्ध (ऋषियों के नाम से तर्पण)
18 सितंबर बुधवार प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध (पितृपक्ष आरंभ)
19 सितंबर गुरुवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध
20 सितंबर शुक्रवार तृतीया तिथि का श्राद्ध
21 सितंबर शनिवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
22 सितंबर शनिवार पंचमी तिथि का श्राद्ध
23 सितंबर सोमवार षष्ठी और सप्तमी तिथि का श्राद्ध
24 सितंबर मंगलवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध
25 सितंबर बुधवार नवमी तिथि का श्राद्ध
26 सितंबर गुरुवार दशमी तिथि का श्राद्ध
27 सितंबर शुक्रवार एकादशी तिथि का श्राद्ध
29 सितंबर रविवार द्वादशी तिथि का श्राद्ध
30 सितंबर सोमवार त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
1 अक्टूबर मंगलवार चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध
2 अक्टूबर बुधवार सर्व पितृ अमावस्या (समापन)
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।