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Parama Ekadashi 2023: 12 अगस्त को परमा एकादशी, जानिए व्रत का महत्व, पूजाविधि और कथा

Wed, 09 Aug 2023 09:55 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद
अनीता जैन ,वास्तुविद Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 09 Aug 2023 09:55 AM IST
सार

श्रावण अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सावन अधिक मास में भगवान विष्णु समेत भोलेनाथ की पूजा आराधना करने का विधान है।

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Parama Ekadashi 2023 kab hai Know Date Time Puja Vidhi Shubh Muhurat Vrat Katha In Hindi
Ekadashi Vrat 2023:एकादशी तिथि विष्णु प्रिया है और अधिक मास भी श्री विष्णुजी को समर्पित है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Parama Ekadashi 2023 : सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत महत्व है। वैसे तो एक वर्ष में 24 एकादशी पड़ती है परन्तु जिस साल अधिक मास पड़ता है, उस साल 26 एकादशी होती हैं। एकादशी तिथि विष्णु प्रिया है और अधिक मास भी श्री विष्णुजी को समर्पित है, इसलिए धार्मिक दृष्टि से इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है। श्रावण अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है। इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा सावन अधिक मास में भगवान विष्णु समेत भोलेनाथ की पूजा आराधना करने का विधान है।

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परमा एकादशी का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अधिक मास की परमा एकादशी धन संकट दूर करने वाली मानी गई है। साथ ही इस व्रत को करने से भगवान विष्णु जल्द प्रसन्न होते हैं और दुख दरिद्रता से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि परमा एकादशी अपने नाम के अनुसार परम सिद्धियां प्राप्त करने वाला व्रत है। शास्त्रों के अनुसार, जब इस व्रत को यक्षों के स्वामी कुबेर जी ने किया था तो भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें धनाध्यक्ष बना दिया था। इतना ही नहीं, इस व्रत को करने से सत्यवादी राजा हरिश्चन्द्र को पुत्र, स्त्री और राज्य की प्राप्ति हुई थी। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के दौरान पांच दिन तक स्वर्ण दान, विद्या दान, अन्न दान, भूमि दान और गौ दान करना चाहिए, ऐसा करने से व्यक्ति को माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उसे धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती।
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इस विधि से करें पूजन
भगवान गणेश प्रथम पूज्य माने जाते हैं, ऐसे में विष्णु जी की पूजा से पहले गणेश जी की पूजा करें। इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु की उपासना करनी चाहिए।पूजा स्थल के ईशान कोण में एक वेदी बनाकर उस पर सप्त धान रखें एवं इस पर जल कलश स्थापित कर इसे आम या अशोक के पत्तों से सजाएं। विष्णु जी के साथ मां लक्ष्मी की मूर्ति जरूर रखें। दक्षिणावर्ती शंख में केसर मिश्रित दूध भरें और सभी देवी-देवताओं का अभिषेक करें। इसके बाद जल से अभिषेक करें। तत्पश्चात पीले पुष्प,ऋतुफल,तुलसी आदि अर्पित कर धूप-दीप व कपूर से भगवान विष्णु की आरती करें। इस दिन विष्णुजी के मंदिर एवं तुलसी के नीचे दीपदान करना बहुत शुभ माना गया है।इस दिन दान-दक्षिणा जरूर करें।
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परमा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में काम्पिल्य नगर में सुमेधा नामक एक ब्राह्मण रहता था व उसकी पत्नी का नाम पवित्रा था। पवित्रा बहुत ज्यादा धार्मिक थी और परम सती व साध्वी स्त्री थी। एक दिन गरीबी से परेशान होकर ब्राह्मण ने विदेश धन कमाने जाने का विचार किया, लेकिन पवित्रा ने कहा कि धन और संतान पूर्व जन्म के फल से प्राप्त होते हैं, इसलिए आप चिंता न करें। कुछ दिनों बाद महर्षि कौंडिन्य गरीब ब्राह्मण के घर आए ।ब्राह्मण दंपति ने तन-मन से महर्षि कौंडिन्य की सेवा की तो उन्होंने गरीबी दूर करने का  धार्मिक उपाय बताया। महर्षि कौंडिन्य ने बताया कि अधिक मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत तथा रात्रि जागरण करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। इतना कहकर मुनि कौंडिन्य चले गए और सुमेधा ने पत्नी सहित व्रत किया। परमा एकादशी व्रत के प्रभाव से उनकी गरीबी दूर हो गई और उन्हें सुखी जीवन प्राप्त हुआ।

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