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Nirjala Ekadashi 2020: जब नारदजी ने एक हजार वर्षों तक किया निर्जला व्रत
Fri, 29 May 2020 10:24 AM IST
रुस्तम राणा
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: रुस्तम राणा
Updated Fri, 29 May 2020 10:24 AM IST
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Nirjala Ekadashi 2020: जब नारदजी ने एक हजार वर्षों तक किया निर्जला व्रत
- फोटो : Social Media
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निर्जला एकादशी व्रत 2 दो जून को है। यह व्रत हर ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार निर्जला एकादशी व्रत समस्त एकादशियों के बराबर पुण्य प्रदान करता है। कहते हैं इस व्रत को महर्षि नारद ने भी किया था, जिसके बाद उन्हें जगत के पालनहार भगवान विष्णुजी का आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
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पौराणिक कथा के अनुसार, श्री श्वेतवाराह कल्प के आरंभ में देवर्षि नारद की विष्णु भक्ति देखकर ब्रह्मा जी बहुत प्रसन्न हुए। नारद जी ने जगत के रचयिता से आग्रह किया कि हे परमपिता! मुझे कोई ऐसा मार्ग बताएं जिससे मैं श्री विष्णु के चरणकमलों में स्थान पा सकूं।
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समस्त एकादशियों के बराबर पुण्य प्रदान करती है निर्जला एकादशी
पुत्र नारद का नारायण प्रेम देखकर ब्रह्मा जी श्री विष्णु की प्रिय निर्जला एकादशी व्रत करने का सुझाव दिया। कहते हैं तब नारद जी ने विष्णु जी के चरणों में स्थान पाने के लिए एक हजार वर्षों तक निर्जल रहकर यह कठोर व्रत किया।
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हजार वर्ष तक निर्जल व्रत करने पर उन्हें चारों तरफ नारायण ही नारायण दिखाई देने लगे। परमेश्वर की इस माया से वे भ्रम में पड़ गए कि कहीं यही तो विष्णु लोक नहीं। तभी उनको भगवान विष्णु के साक्षात दर्शन हुए, उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर नारायण ने उन्हें अपनी निश्छल भक्ति का वरदान देते हुए अपने श्रेष्ठ भक्तों में स्थान दिया और तभी से निर्जला व्रत की शुरुआत हुई।