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Navratri Kanya Pujan 2024: अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का महत्व, जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
Tue, 16 Apr 2024 07:30 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 16 Apr 2024 07:30 AM IST
सार
कन्या पूजन से मां दुर्गा जल्दी प्रसन्न होती हैं। शास्त्रों के अनुसार कन्याओं को देवी का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं की पूजा की जाती है।
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नवरात्रि पर कन्या पूजन का महत्व
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Navratri Kanya Pujan 2024: आज चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि है और नवरात्रि के हर दिन मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा पूरे विधि-विधान के साथ हो रही है। हिंदू धर्म में नवरात्रि के त्योहार का विशेष महत्व होता है। इस बार चैत्र नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि आरंभ होते हैं और नवमी तिथि पर समापन होता है। नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना और कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विधान होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि पर कन्या पूजन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि पर कैसे करें कन्या पूजन...
कन्या पूजन का महत्व
मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा जल्दी प्रसन्न होती हैं। शास्त्रों के अनुसार कन्याओं को देवी का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं की पूजा की जाती है। कन्या पूजन में 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष की आयु की कन्याओं को घर पर बुलाकर उनका पूजन और भोजन के लिए आमंत्रित किया जाता है।
चैत्र नवरात्रि कन्या पूजन तिथि 2024
नवरात्रि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन किया जाता है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 16 अप्रैल और नवमी तिथि 17 अप्रैल 2024 को है।
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नवरात्रि अष्टमी कन्या पूजन मुहूर्त 2024
16 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 51 मिनट से लेकर 10 बजकर 41 मिनट तक मां दुर्गा की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं जो लोग दोपहर को कन्या पूजन करना चाह रहे हैं वे 01 बजकर 30 मिनट से लेकर 02 बजकर 55 मिनट तक कन्या पूजन कर सकते हैं
महानवमी कन्या पूजन मुहूर्त 2024
17 अप्रैल को महानवमी है और इस दिन सुबह 06 बजकर 27 मिनट से लेकर 07 बजकर 51 तक कन्या पूजन कर सकते हैं। वहीं दोपहर को अगर कन्या पूजन करना चाहते हैं तो 01 बजकर 30 मिनट से लेकर 02 बजकर 55 मिनट किया जा सकता है।
कन्या पूजन की विधि
जो लोग नवरात्रि पर मां दुर्गा की उपासना और उपवास रखते हैं उनको अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन जरूर करना चाहिए। सबसे पहले कन्या पूजन का संकल्प लें और कन्याओं को निमंत्रण दें। फिर घर पर कन्याओं के आगमन पर पूजन करते समय शुद्ध जल से उनके चरण धोने चाहिए फिर आसन पर बैठाएं। खीर, पूरी,चने, हलवा आदि भोजन का माता को भोग लगाकर कन्याओं को भोजन कराएं। कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें टीका लगाएं और कलाई पर रक्षासूत्र बांधें। प्रदक्षिणा कर उनके चरण स्पर्श करते हुए यथाशक्ति वस्त्र, फल और दक्षिणा देकर विदा करें।
कन्या पूजन मंत्र
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्येत्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।
ऊं श्री दुं दुर्गायै नम:
ऊं श्री कुमार्यै नम:
ऊं श्री त्रिगुणात्मिकायै नम:
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कन्या पूजन का महत्व
मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा जल्दी प्रसन्न होती हैं। शास्त्रों के अनुसार कन्याओं को देवी का स्वरूप माना गया है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं की पूजा की जाती है। कन्या पूजन में 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष की आयु की कन्याओं को घर पर बुलाकर उनका पूजन और भोजन के लिए आमंत्रित किया जाता है।
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चैत्र नवरात्रि कन्या पूजन तिथि 2024
नवरात्रि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन किया जाता है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 16 अप्रैल और नवमी तिथि 17 अप्रैल 2024 को है।
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नवरात्रि अष्टमी कन्या पूजन मुहूर्त 2024
16 अप्रैल को सुबह 07 बजकर 51 मिनट से लेकर 10 बजकर 41 मिनट तक मां दुर्गा की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं जो लोग दोपहर को कन्या पूजन करना चाह रहे हैं वे 01 बजकर 30 मिनट से लेकर 02 बजकर 55 मिनट तक कन्या पूजन कर सकते हैं
महानवमी कन्या पूजन मुहूर्त 2024
17 अप्रैल को महानवमी है और इस दिन सुबह 06 बजकर 27 मिनट से लेकर 07 बजकर 51 तक कन्या पूजन कर सकते हैं। वहीं दोपहर को अगर कन्या पूजन करना चाहते हैं तो 01 बजकर 30 मिनट से लेकर 02 बजकर 55 मिनट किया जा सकता है।
कन्या पूजन की विधि
जो लोग नवरात्रि पर मां दुर्गा की उपासना और उपवास रखते हैं उनको अष्टमी या नवमी तिथि पर कन्या पूजन जरूर करना चाहिए। सबसे पहले कन्या पूजन का संकल्प लें और कन्याओं को निमंत्रण दें। फिर घर पर कन्याओं के आगमन पर पूजन करते समय शुद्ध जल से उनके चरण धोने चाहिए फिर आसन पर बैठाएं। खीर, पूरी,चने, हलवा आदि भोजन का माता को भोग लगाकर कन्याओं को भोजन कराएं। कन्याओं को भोजन कराने के बाद उन्हें टीका लगाएं और कलाई पर रक्षासूत्र बांधें। प्रदक्षिणा कर उनके चरण स्पर्श करते हुए यथाशक्ति वस्त्र, फल और दक्षिणा देकर विदा करें।
कन्या पूजन मंत्र
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्येत्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।
ऊं श्री दुं दुर्गायै नम:
ऊं श्री कुमार्यै नम:
ऊं श्री त्रिगुणात्मिकायै नम: