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Navratri 2020: 17 अक्तूबर से शारदीय नवरात्रि, कलश स्थापना से लेकर कन्या पूजन तक जानिए सबकुछ
Wed, 14 Oct 2020 01:52 PM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Wed, 14 Oct 2020 01:52 PM IST
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शारदीय नवरात्रि 2020
- फोटो : अमर उजाला
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Navratri 2020: हिंदू धर्म में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व होता है। नवरात्रि देवी दुर्गा की आराधना का त्योहार होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से दुर्गा मां की आराधना आरंभ हो जाती है। पहले दिन कलश स्थापना के साथ माता के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा होती है। नवरात्रि के नौ दिनों में हर एक दिन का अलग महत्व होता है। नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि से लेकर आखिरी दिन तक कई प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस बार नवरात्रि मलमास लगने के वजह से एक महीने की देरी से आरंभ हो रहे हैं। आइए जानते नवरात्रि के बारे में सबकुछ....
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नवरात्रि पूजा का महत्व
नवरात्रि 2020
- नवरात्रि का व्रत पूरे नौ दिनों तक रखा जाता है।जिसमें सात्विक रहकर माता की आराधना होती है।
- नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना कर माता का स्वागत किया जाता है।
- नवरात्रि पर पूरे नौ दिनों तक उपवास रखकर मां दुर्गा की विधिवत रूप से आराधना की जाती है।
- नवरात्रि में माता को हर दिन अलग-अलग भोग लगाया जाता है।
- नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन के साथ नवरात्रि का समापन होता है।
- नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना कर माता का स्वागत किया जाता है।
- नवरात्रि पर पूरे नौ दिनों तक उपवास रखकर मां दुर्गा की विधिवत रूप से आराधना की जाती है।
- नवरात्रि में माता को हर दिन अलग-अलग भोग लगाया जाता है।
- नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन के साथ नवरात्रि का समापन होता है।
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एक वर्ष में चार नवरात्रि
हिंदू कैलेंडर के अनुसार साल में कुल चार नवरात्रि होते हैं- दो सामान्य नवरात्रि और दो गुप्त नवरात्रि। चैत्र और आश्विन माह का नवरात्रि और आषाढ़ और माघ के गुप्त नवरात्रि। तांत्रिक सिद्धियों को प्राप्त करने के लिए गुप्त नवरात्रि में मां की उपासना होती है जबकि गृहस्थ जीवन में सभी तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए चैत्र और शारदीय नवरात्रि को प्रमुख माना जाता है।
घटस्थापना/ कलश स्थापना विधि
Wallpapers Navratri 2020
- फोटो : Amar Ujala
नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर घटस्थापना की जाती है। पूजा स्थल पर मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ बोएं और मिट्टी का कलश रखें। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक आदि लिख दें। आपको कोई भी मंत्र आता हो या नहीं आता हो इस बात की चिंता न करें। कलश स्थापन के समय अपने पूजागृह में पूर्व के कोण की तरफ अथवा घर के आँगन से पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज रखें। संभव हो तो नदी की रेत रखें फिर जौ भी डाले इसके उपरांत कलश में जल, गंगाजल, लौंग, इलायची,पान, सुपारी, रोली, मोली, चन्दन, अक्षत, हल्दी, रुपया पुष्पादि डालें।
नवरात्रि के 9 दिन और 9 देवियां
Wallpapers Navratri 2020
- फोटो : Amar Ujala
पहला दिन- प्रतिपदा- मां शैलपुत्री की उपासना
दूसरा दिन- द्वितीया- मां ब्रह्राचारिणी की उपासना
तीसरा दिन- तृतीया- मां चंद्रघंटा की उपासना
चौथा दिन- चतुर्थी तिथि- मां कूष्मांडा की उपासना
पांचवा दिन- पंचमी तिथि- मां स्कंदमाता की उपासना
छठा दिन- षष्ठी तिथि- मां कात्यायनी की उपासना
सातवां दिन- सप्तमी तिथि- मां कालरात्रि की उपासना
आठवां दिन- अष्टमी तिथि- मां महागौरी की उपासना
नौवा दिन- नवमी तिथि- मां सिद्धिदात्री की उपासना
दूसरा दिन- द्वितीया- मां ब्रह्राचारिणी की उपासना
तीसरा दिन- तृतीया- मां चंद्रघंटा की उपासना
चौथा दिन- चतुर्थी तिथि- मां कूष्मांडा की उपासना
पांचवा दिन- पंचमी तिथि- मां स्कंदमाता की उपासना
छठा दिन- षष्ठी तिथि- मां कात्यायनी की उपासना
सातवां दिन- सप्तमी तिथि- मां कालरात्रि की उपासना
आठवां दिन- अष्टमी तिथि- मां महागौरी की उपासना
नौवा दिन- नवमी तिथि- मां सिद्धिदात्री की उपासना
क्यों बोया जाता है नवरात्रि में जौ?
जौ से अंकुरित हुई जयंती
नवरात्रि में पूजा स्थल के पास जौ बोने की परंपरा होती है। इसके पीछे का कारण यह कि जौ को ब्रह्रा स्वरुप और पृथ्वी की पहली फसल जौ को माना गया है।
कन्या पूजन क्यों?
kanya pujan
नवरात्रि पर 10 साल से छोटी कन्याओं का पूजन किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि छोटी कन्याओं में मां का स्वरूप होता है और यह ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं। इसलिए नवरात्रि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है।
नवरात्रि पर माता का आगमन और वाहन
हर नवरात्रि पर माता का आगमन अलग-अलग दिन के हिसाब से अलग-अलग सवारी पर होती है।
नवरात्रि का पहला दिन- रविवार या सोमवार- मां दुर्गा का हाथी की सवारी पर आगमन - शुभ
नवरात्रि का पहला दिन- शनिवार और मंगलवार- मां दुर्गा का घोड़े की सवारी पर आगमन - अशुभ
नवरात्रि का पहला दिन- गुरुवार और शुक्रवार- मां दुर्गा का पालकी की सवारी पर आगमन - अशुभ
नवरात्रि का पहला दिन- बुधवार- मां दुर्गा की नाव की सवारी पर आगमन - शुभ
नवरात्रि के 9 दिन और मंत्र
navratri 2020
पहला दिन- ह्रीं शिवायै नम:।
दूसरा दिन- ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
तीसरा दिन- ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
चौथा दिन- ऐं ह्री देव्यै नम:।
पांचवां दिन- ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
छठा दिन- क्लीं श्री त्रिनेत्राय नम:।
सातवां दिन- क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
आठवां दिन- श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
नौवां दिन- ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
दूसरा दिन- ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
तीसरा दिन- ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
चौथा दिन- ऐं ह्री देव्यै नम:।
पांचवां दिन- ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
छठा दिन- क्लीं श्री त्रिनेत्राय नम:।
सातवां दिन- क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
आठवां दिन- श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
नौवां दिन- ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
नवरात्रि के 9 दिन और 9 रंग
Happy Navratri 2020
- फोटो : अमर उजाला
पहला दिन- पीला रंग
दूसरा दिन- हरा रंग
तीसरा दिन- भूरा रंग
चौथा दिन- नारंगी रंग
पांचवां दिन- सफेद रंग
छठा दिन- लाल रंग
सातवां दिन- नीला रंग
आठवां दिन- गुलाबी रंग
नौवां दिन- बैंगनी रंग
दूसरा दिन- हरा रंग
तीसरा दिन- भूरा रंग
चौथा दिन- नारंगी रंग
पांचवां दिन- सफेद रंग
छठा दिन- लाल रंग
सातवां दिन- नीला रंग
आठवां दिन- गुलाबी रंग
नौवां दिन- बैंगनी रंग
नवरात्रि के 9 दिन और मां दुर्गा को भोग
नवरात्रि में गृह प्रवेश
पहला दिन- गाय की घी
दूसरा दिन- चीनी, मिश्री
तीसरा दिन- दूध और मिठाई
चौथा दिन- मालपुआ
पांचवां दिन- केला
छठा दिन- शहद
सातवां दिन- गुड़
आठवां दिन- नारियल
नौवां दिन- तिल
दूसरा दिन- चीनी, मिश्री
तीसरा दिन- दूध और मिठाई
चौथा दिन- मालपुआ
पांचवां दिन- केला
छठा दिन- शहद
सातवां दिन- गुड़
आठवां दिन- नारियल
नौवां दिन- तिल