नवरात्रि 2018 : इस सरल मंत्र और पूजन विधि से कलश बिठाने पर मिलेगा माता का आशीर्वाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नवरात्र का पावन पर्व पुनः आ रहा है, यही आश्विन माह शुक्ल पक्ष है जिसमे हम परब्रह्म शक्ति की उपासना करके स्वयं को और अपने परिवार को भी त्रिबिध तापों ( दैहिक, दैविक और भौतिक ) से मुक्ति दिला सकते हैं। संसार में सबसे सरल उपासना या तो माता शक्ति की है या भगवान् शिव की है। मां कभी नाराज़ नहीं होतीं और भोलेनाथ अपने भक्तों कि गलतियों पर ध्यान नहीं देते। मित्रों पांच ज्ञान इंद्रियां, पांच कर्म इंद्रियां और एक मन समेत इन ग्यारह को जो संचालित करती हैं, वही परम शक्ति माँ हैं, जो जीवात्मा, परमात्मा, भूताकाश, चित्ताकाश और चिदाकाश के में सर्वव्यापी है, वही माँ शक्ति हैं। इनकी श्रद्धाभाव से आराधना की जाए तो चारो पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कैसे करें मां की साधना-आराधना
आप नवरात्र में माता शक्ति की आराधना करते समय दो बातों का ध्यान रखें। भवानी शंकरौ वन्दे श्रद्धा विश्वास रुपिणौ, याभ्यां बिना न पश्यन्ति सिद्धः स्वान्तः थमीस्वरम। अर्थात् माता शक्ति अथवा किसी भी देवी-देवता की आराधना के श्रद्धा-विश्वास और समर्पण का होना अति आवश्यक है। आप को विश्वास है, किन्तु श्रद्धा नहीं है, तो उस पूजा का कोई लाभ नहीं होगा। श्रद्धा है किन्तु विश्वास नहीं है तो भी उस पूजा का कोई लाभ नहीं होगा। अगर ये दोनों हैं और समर्पण भी है तो आप को परमानंद की प्राप्ति होगी। माँ की कृपा आप पर निरंतर बरसती रहेगी।
कलश स्थापना एवं शक्ति पूजा की संपूर्ण विधि
नवरात्र के दिन आप सुबह स्नान-ध्यान करके माता दुर्गा, भगवान् गणेश नवग्रह कुबेरादि की मूर्ति के साथ साथ कलश स्थापना करें, कलश सोना, चांदी, तांबा, पीतल या मिट्टी का होना चाहिए। लोहे अथवा स्टील का कलश पूजा मे प्रयोग नहीं करना चाहिए। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक आदि लिख दें। आप को कोई भी मंत्र आता हो या नहीं आता आता हो इस विषय को लेकर चिंता न करें। कलश स्थापना के समय अपने पूजा गृह में पूर्व के कोण की तरफ अथवा घर के आँगन से पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज रखें। संभव हो तो नदी की रेत रखें। इसके पश्चात् जौ भी डालें और कलश में जल-गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, मोली, चन्दन, अक्षत, हल्दी, रुपया पुष्पादि डालें। फिर ॐ भूम्यै नमः कहते हुए कलश को सात अनाजों सहित रेत के ऊपर स्थापित करें। अब कलश में थोड़ा और जल-गंगाजल डालते हुए ॐ वरुणाय नमः कहते हुए पूर्ण रूप से भरदें। इसके बाद आम कि पल्लव डालें, यदि आम की पल्लव न हो तो पीपल, बरगद, गूलर अथवा पाकर की पल्लव कलश के ऊपर रखने का बिधान है। जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे मे भरकर कलश के ऊपर रखें। अब उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखें। साथ ही नवग्रह भी बनाएं और अपने हाथ में हल्दी अक्षत पुष्प लेकर मन में ही संकल्प लें कि माँ मैं आज नवरात्रि की प्रतिपदा से आप की आराधना अमुक कार्य के लिए कर रहा-रही हूँ, मेरी पूजा स्वीकार करो और मेरे ईष्ट कार्य को सिद्ध करो माँ। अपने पूजा स्थल से दक्षिण और पूर्व की तरफ घी का दीपक जलाते हुए, ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दनः! दीपो हरतु में पापं पूजा दीप नमोस्तु ते यह मंत्र पढ़ें!
शक्ति की साधना की सबसे सरल विधि
माता की आराधना के समय यदि आप को कोई भी मन्त्र नहीं आता हो तो आप केवल दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे से सभी पूजा कर सकते हैं। यही मंत्र पढ़ते हुए सामग्री चढ़ाएं। माता शक्ति का यह अमोघ मन्त्र है। जो भी यथा संभव सामग्री हो आप उसकी चिंता न करें कुछ भी सुलभ न हो तो केवल हल्दी अक्षत और पुष्प से ही माता की आराधना करें संभव हो श्रृंगार का सामान और नारियल-चुन्नी जरुर चढ़ाएं। एक ही बात का ध्यान रखें माँ शक्ति ही परब्रह्म हैं, उन्हें आप के भाव और भक्ति चाहिए सामग्री नहीं। इसलिए जो भी सामग्री आप के पास उपलब्ध हो वही बिलकुल भक्ति भाव और समर्पण के साथ माँ को अर्पित करें। धन और सामग्री के अभाव में अपने मन में दुख अथवा ग्लानि को स्थान न दें। आप एक ही मंत्र से पूजा और आरती तक कर सकते हैं।