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Narad Jayanti 2021 Date: ब्रह्माजी के मानस पुत्र बनने के लिए नारदमुनि ने की थी कठोर तपस्या

Fri, 21 May 2021 06:39 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Fri, 21 May 2021 06:39 AM IST
सार

नारद जयंती 27 मई को मनाई जाएगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार, नारद जयंती प्रति वर्ष ज्येष्ठ माह में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। पौराणिक कथा के अनुसार, नारद मुनि ब्रह्रााजी के मानस पुत्र हैं। ब्रह्रााजी का मानस पुत्र बनने के लिए उन्होंने कड़ी तपस्या की थी।

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Narad Jayanti 2021 Date puja vidhi and story
नारद जयंती 2021: नारद जयंती प्रति वर्ष ज्येष्ठ माह में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है।  - फोटो : Social Media

विस्तार

नारद जयंती 27 मई को मनाई जाएगी। हिन्दू पंचांग के अनुसार, नारद जयंती प्रति वर्ष ज्येष्ठ माह में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। नारद मुनि को देवताओं का संदेशवाहक कहा जाता है। वे तीनों लोकों में संवाद का माध्यम बनते थे। इसलिए नारद मुनि की जयंती को पत्रकार दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। भगवान विष्णु उनके आराध्य देव हैं और एक मुनि की तरह उनका वेश है। नारद मुनि के एक हाथ में वीणा है और दूसरे हाथ में भी वाद्य यंत्र है। 

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नारद जयंती की पूजा विधि
सूर्योदय से पहले स्नान करें। व्रत का संकल्प करें। साफ-सुथरा वस्त्र पहन कर पूजा-अर्चना करें। नारद मुनि को चंदन, तुलसी के पत्ते, कुमकुम, अगरबत्ती, फूल अर्पित करें। शाम को पूजा करने के बाद, भक्त भगवान विष्णु की आरती करें। दान पुण्य का कार्य करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें कपड़े और पैसे दान करें।
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ऐसे हुआ था नारद मुनि का जन्म
पौराणिक कथा के अनुसार, नारद मुनि ब्रह्रााजी के मानस पुत्र हैं। ब्रह्रााजी का मानस पुत्र बनने के लिए उन्होंने पिछले जन्म में कड़ी तपस्या की थी। कहा जाता है कि पूर्व जन्म में नारद मुनि गंधर्व कुल में पैदा हुए थे और और उन्हें अपने रूप पर बहुत ही घमंड था। पूर्व जन्म में उनका नाम उपबर्हण था।  एक बार कुछ अप्सराएं और गंधर्व गीत और नृत्य से भगवान ब्रह्मा की उपासना कर रही थीं। तब उपबर्हण स्त्रियों के साथ श्रृंगार भाव से वहां आए। ये देख ब्रह्मा जी अत्यंत क्रोधित हो उठे और उपबर्हण को श्राप दे दिया कि वह 'शूद्र योनि' में जन्म लेगा।
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ब्रह्मा जी के श्राप से उपबर्हण का जन्म एक शूद्र दासी के पुत्र के रूप में हुआ। बालक ने अपना पूरा जीवन ईश्वर की भक्ति में लगाने का संकल्प लिया और ईश्वर को जानने और उनके दर्शन करने की इच्छा पैदा हुई। बालक के लगातार तप के बाद एक दिन अचानक आकाशवाणी हुई, हे बालक! इस जन्म में आपको भगवान के दर्शन नहीं होंगे बल्कि अगले जन्म में आप उनके पार्षद के रूप उन्हें पुनः प्राप्त कर सकेंगे।

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