फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Mahashivratri 2023 Planting Bel Patra Plant Get More Wealth Know Bel Patra ke Fayde in Hindi

Mahashivratri 2023: 18 फरवरी को महाशिवरात्रि पर शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं बेलपत्र , जानिए इसके फायदे और नियम

Sun, 12 Feb 2023 12:53 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sun, 12 Feb 2023 12:53 PM IST
सार

भगवान शिव को बेलपत्र बहुत ही प्रिय होता है। शास्त्रों में बेलपत्र को चढ़ाने के नियम और कई तरह के फायदे मिलते हैं।

विज्ञापन
Mahashivratri 2023 Planting Bel Patra Plant Get More Wealth Know Bel Patra ke Fayde in Hindi
Mahashivratri 2023: बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता। पहले से चढ़ाया हुआ बेलपत्र भी फिर से धोकर चढ़ाया जा सकता है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Mahashivratri 2023: महाशिवरात्रि का त्योहार जल्द आने वाला है। इस बार महाशिवरात्रि 18 फरवरी, शनिवार दिन मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना, पूजा-पाठ, जाप और साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। महाशिवरात्रि पर देश के सभी शिव मंदिरों में भारी भीड़ होती है। शिव भक्त इस पावन दिन शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ की पूजा करने पर सभी तरह की मनोकामनाएं जल्द से जल्द पूरी होती हैं। भगवान शिव को बेलपत्र बहुत ही प्रिय होता है। शास्त्रों में बेलपत्र को चढ़ाने के नियम और कई तरह के फायदे मिलते हैं। आइए जानते हैं शिवलिंग पर क्यों चढ़ाया जाता है बेलपत्र...

विज्ञापन


कैसे अर्पित करें शिवजी को बेलपत्र

  • भगवान शिव को हमेशा उल्टा बेलपत्र यानी चिकनी सतह की तरफ वाला वाला भाग स्पर्श कराते हुए ही बेलपत्र चढ़ाएं।
  • बेलपत्र को हमेशा अनामिका, अंगूठे और मध्यमा अंगुली की मदद से चढ़ाएं एवं मध्य वाली पत्ती को पकड़कर शिवजी को अर्पित करें।
  • विज्ञापन
  •  शिव जी को कभी भी सिर्फ बिल्वपत्र अर्पण नहीं करें,बेलपत्र के साथ जल की धारा जरूर चढ़ाएं।
  • बेलपत्र की तीन पत्तियां ही भगवान शिव को चढ़ती है। कटी-फटी पत्तियां कभी न चढ़ाएं।
  • कुछ तिथियों को बेलपत्र तोड़ना वर्जित होता है। जैसे कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को, संक्रांति के समय और सोमवार को बेल पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसे में पूजा से एक दिन पूर्व ही बेल पत्र तोड़कर रख लिया जाता है।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता। पहले से चढ़ाया हुआ बेलपत्र भी फिर से धोकर चढ़ाया जा सकता है।


बेलपत्र का महत्व
बेलपत्र की तीन पत्तियों वाला गुच्छा भगवान शिव को चढ़ाया जाता है और माना जाता है कि इसके मूलभाग में सभी तीर्थों का वास होता है। मान्यता है कि जिस घर में बेल का वृक्ष होता है वहां धन-धान्य की कभी कोई कमी नहीं होती।

जो भक्त भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाता है उसके सारे दुख दूर हो जाते हैं और भोलेनाथ उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं।

Mahashivratri 2023: देवों के देव महादेव की आराधना का महापर्व है महाशिवरात्रि, जाने महत्व और पूजन विधि
MahaShivratri 2023: महाशिवरात्रि के दिन करें शिव-पार्वती चालीसा का पाठ, अखंड सौभाग्य की होगी प्राप्ति

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed