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Mahashivratri 2023: आज है महापर्व महाशिवरात्रि, करें महादेव के पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ, मिलेगा अपार वैभव

Sat, 18 Feb 2023 10:32 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 18 Feb 2023 10:32 AM IST
सार

भगवान भोलेनाथ का मंत्र ॐ नमः शिवाय के जाप से पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश और वायु पांचों तत्व नियंत्रित किए जा सकते हैं। ये मंत्र मोक्षदायी माना गया है और समस्त वेदों का सार है। इस मंत्र का प्रत्येक अक्षर अपने आप में बेहद शक्तिशाली है। इस पंचाक्षर मंत्र के हर अक्षर की महिमा का गुणगान करने के लिए जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने पंचाक्षर स्तोत्र बनाया था।  

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Mahashivratri 2023 Do Panchakshar Stotra Path on Mahashivratri you may get the ownership of immense wealth
महाशिवरात्रि पर करें महादेव के पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Mahashivratri Panchakshar Stotra 2023: आज महाशिवरात्रि का त्योहार पूरे देश में मनाया जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार महाशिवरात्रि का पर्व हर वर्ष फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। महाशिवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे बड़े और प्रमुख त्योहारों में से एक है।  पौराणिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। भगवान भोलेनाथ का मंत्र ॐ नमः शिवाय के जाप से पृथ्वी, अग्नि, जल, आकाश और वायु पांचों तत्व नियंत्रित किए जा सकते हैं। ये मंत्र मोक्षदायी माना गया है और समस्त वेदों का सार है। इस मंत्र का प्रत्येक अक्षर अपने आप में बेहद शक्तिशाली है। इस पंचाक्षर मंत्र के हर अक्षर की महिमा का गुणगान करने के लिए जगद्गुरु आदि शंकराचार्य ने पंचाक्षर स्तोत्र बनाया था।  इस स्तोत्र में पंचाक्षर (न,म,शि,व,य) की शक्ति का वर्णन किया गया है। नियमित रूप से यदि इस स्तोत्र को सच्चे मन से पढ़ा जाए तो असंभव कामों को भी संभव बनाया जा सकता है।  महाशिवरात्रि के दिन से आप इस स्तोत्र का पाठ आरंभ का सकते हैं। यहां  पढ़ें पूरा स्तोत्र। 

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पंचाक्षर स्तोत्र का महत्व 
पंचाक्षर स्तोत्र के बारे में मान्यता है कि जो साधक श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करते हैं भगवान भोलेनाथ उनसे बेहद प्रसन्न होते हैं। इससे स्तोत्र के पाठ से व्यक्ति के सारे कष्ट दूर होते हैं। मान्यता है कि ये स्तोत्र व्यक्ति की अकाल मृत्यु को टाल सकता है। इसके नियमित पाठ से काल सर्प दोष का प्रभाव भी दूर होता है। शिव पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ करते समय कपूर और इत्र का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। 
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शिव पञ्चाक्षर स्तोत्रम्
 
नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम:शिवाय॥1॥

मंदाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथ महेश्वराय।
मण्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नम:शिवाय॥2॥

शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्दसूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय।
श्रीनीलकण्ठाय बृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नम:शिवाय॥3॥

वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय।
चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय तस्मै वकाराय नम:शिवाय॥4॥

यक्षस्वरूपाय जटाधराय पिनाकहस्ताय सनातनाय।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय तस्मै यकाराय नम:शिवाय॥5॥

पञ्चाक्षरिमदं पुण्यं य: पठेच्छिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥6॥

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